नोएडा के छलेरा बांगर गांव के करीब 600 भू-मालिकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने 1991 में अधिग्रहित उनकी जमीन का मुआवजा 340 रुपये से बढ़ाकर 403 रुपये प्रति वर्ग गज कर दिया है।
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने भू-मालिकों की अर्जियां मंजूर करते हुए नोएडा प्राधिकरण को बढ़े हुए मुआवजे की गणना कर तीन महीने के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया है।
ये निर्देश प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना की पीठ ने भू- मालिकों के वकील डॉक्टर राजीव शर्मा की दलीलें सुनने के बाद गत 25 अगस्त को दिये। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता भू-मालिकों के वकील राजीव शर्मा की दलील थी कि समान परिस्थितियों वाले भू-मालिकों को समान मुआवजा मिलना संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का हिस्सा है।
उन्होंने इसी 1991 के छलेरा गांव के अधिग्रहण के कुछ भूमालिकों के बारे में आये सुप्रीम कोर्ट के 10 जुलाई 2024 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कोर्ट ने उस मामले में मुआवजा 340 रुपये प्रति वर्ग गज से बढ़ा कर 403 रुपये प्रति वर्ग गज किया था इसलिए इस मामले में भी इसी दर से मुआवजा मिलना चाहिए।
दूसरी ओर नोएडा अथॉरिटी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रविन्द्र कुमार ने अर्जियों का जोरदार विरोध करते हुए कहा चूंकि भूमि- मालिक 340 रुपये प्रति वर्ग गज की दर से मुआवजा स्वीकार कर चुके हैं, इसलिए इतने लंबे समय बाद अधिक मुआवजे की मांग की अनुमति नहीं दी जा सकती।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने सभी भू-मालिकों की कुल 49 अर्जियां मंजूर कर कर ली और कहा कि ये समानता के हकदार हैं।
पीठ ने नोएडा अथॉरिटी को आदेश दिया कि वह बढ़े मुआवजे की गणना करके तीन महीने में मुआवजा दे। छलेरा बांगर गांव में जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना पांच जनवरी 1991 को निकली थी। विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने मुआवजा महज 110 रुपये प्रति वर्ग गज तय किया था।
रिफरेंस कोर्ट ने मुआवजा बढ़ाकर 233 रुपये प्रति वर्ग गज और फिर हाईकोर्ट ने 19 मई 2010 को बढ़ाकर 340 रुपये प्रति वर्ग गज कर दिया। नोएडा प्राधिकरण ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिकाएं दायर कीं, लेकिन 5 फरवरी 2014 को वे खारिज हो गईं।
बाद में इसी गांव और उसी 5 जनवरी 1991 की अधिसूचना से जुड़े बीर सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा बढ़ाकर 449 रुपये प्रति वर्ग गज कर दिया। फिर हरनंद सिंह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और बीर सिंह फैसले के आधार पर 449 रुपये की दर से मुआवजे की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई 2024 के फैसले में पूरे अधिग्रहित क्षेत्र के लिए मुआवजा 403 रुपये प्रति वर्ग गज तय किया था। इसी को आधार बनाकर इन भूमालिकों ने करीब 49 अर्जियां दाखिल कर समानता के अधिकारी की दुहाई देते हुए मुआवजा 403 रुपये प्रति वर्ग गज करने की मांग की थी जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने ये ताजा आदेश दिया है। इस फैसले से करीब 600 से ज्यादा भू-मालिक लाभान्वित होंगे।