चीनी कीमतों को नियंत्रित करने के प्रयास में जुटी केंद्र सरकार का जोर गन्ने की पेराई एक महीना पहले शुरू करने पर है। ऐसा होता है तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को हो सकता है, क्योंकि समय से पहले कटाई से गन्ने का वजन और रिकवरी रेट दोनों घटते हैं।
सामान्य तौर पर देश में गन्ने की पेराई मध्य नवंबर से शुरू होती है, जो अप्रैल-मई तक चलती है। इस बार चीनी महंगी होने के कारण सरकार चाहती है कि एक महीना पहले नई चीनी बाजार में आ जाए, ताकि मौजूदा स्टाक खत्म होने से पहले आपूर्ति बनी रहे और त्योहारी सीजन में कीमतों को काबू में रखा जा सके।
सरकार के इस प्रयास से उपभोक्ताओं और चीनी बाजार को आपूर्ति बढ़ने का फायदा मिल सकता है, लेकिन किसानों की आमदनी प्रभावित हो सकती है। शुरुआती कटाई में गन्ने की चीनी रिकवरी करीब 1.5 प्रतिशत अंक तक कम रह सकती है, जबकि वजन में भी 10 से 15 प्रतिशत तक कमी आने की आशंका है।
किसानों को समय से पहले कटाई करने पर कम वजन का गन्ना मिल को देना पड़ सकता है और उसकी उपज से होने वाली आय घट सकती है।
इसी आशंका को देखते हुए चीनी उद्योग और केंद्र सरकार की बैठक मंगलवार को होने जा रही है। केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण सचिव संजीव चोपड़ा ने बैठक बुलाई है। इसमें महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक के अधिकारी शामिल होंगे। देश के कुल चीनी उत्पादन में इन तीन राज्यों की हिस्सेदारी करीब 80 प्रतिशत है।
चीनी उद्योग का प्रस्ताव है कि 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच पेराई किए जाने वाले गन्ने के लिए मिलों को 500 रुपये और किसानों को सीधे 300 रुपये प्रति टन की विशेष सब्सिडी दी जाए।
हालांकि किसानों को सामान्य हालात में समय से पहले गन्ना बेचने पर बाध्य नहीं किया जा सकता, लेकिन आरक्षित क्षेत्र और मिलों के साथ तय आपूर्ति के कारण अप्रत्यक्ष दबाव रहता है। मिलें यदि जल्द पेराई शुरू करती हैं तो किसानों को पर्ची और आपूर्ति कार्यक्रम भी उसी के अनुरूप दिया जाएगा। ऐसे में तैयार फसल को निर्धारित समय पर काटकर मिल तक पहुंचाना किसान की व्यावहारिक मजबूरी बन सकता है।
सितंबर के अंत तक देश में करीब 35 लाख टन चीनी का स्टाक रहने का अनुमान है। फिर भी सरकार चाहती है कि स्टाक खत्म होने से पहले नई चीनी बाजार में पहुंच जाए। हाल के महीनों में एक्स-मिल कीमतें करीब 68 रुपये किलो तक पहुंच गई थीं और खुदरा कीमत करीब 80 रुपये किलो हो गई थी।
सरकारी हस्तक्षेप के बाद एक्स-मिल कीमत करीब 41 रुपये किलो तक आ गई है। आपूर्ति बढ़ाने के लिए केंद्र ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी देने के साथ व्यापारियों की स्टाक सीमा भी घटाई है।