त्योहारों पर मिलावट की आशंका होगी कम, महाराष्ट्र एफडीए ने पहली बार जारी किया सालभर का खाद्य सुरक्षा कैलेंडर…

महाराष्ट्र राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने गुरुवार को सालभर का खाद्य सुरक्षा कैलेंडर पहली बार जारी किया। इस कैलेंडर को इसलिए जारी किया गया है ताकि त्योहारों के दौरान खाद्य सुरक्षा उपायों की योजना पहले से ही बनाई जा सके और हर त्योहार के लिए अलग से आदेश जारी करने की जरूरत न पड़े।

एफडीए के आदेश में गणेशोत्सव, नवरात्र, दिवाली, ईद-उल-फितर, क्रिसमस, नववर्ष, मकर संक्रांति, महाशिवरात्रि, होली, रंगपंचमी, गुड़ी पड़वा, अक्षय तृतीया, वट पूर्णिमा, रक्षाबंधन, नाग पंचमी, जन्माष्टमी, दहीहांडी, दशहरा, कोजागिरी पूर्णिमा, तुलसी विवाह और गुरु नानक जयंती जैसे त्योहारों का उल्लेख है।

आदेश में कहा गया है कि त्योहारों के दौरान मिठाइयों, खाने-पीने की वस्तुओं , डेयरी उत्पादों, खाद्य तेल और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग में भारी बढ़ोतरी होती है, जिससे मिलावट और असुरक्षित खाद्य पदार्थों की बिक्री की आशंका बढ़ती है।

एफडीए ने इसके लिए त्योहारों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया है। पहली श्रेणी के त्योहारों के लिए चार स्तरीय निरीक्षण व्यवस्था होगी। इसमें गणेशोत्सव, नवरात्र, दिवाली, ईद-उल-फितर क्रिसमस जैसे त्योहार शामिल हैं।

दूसरी श्रेणी में मकर संक्रांति, महाशिवरात्रि, होली, रंगपंचमी, गुड़ी पड़वा, अक्षय तृतीया, वट पूर्णिमा, रक्षाबंधन, नाग पंचमी, जन्माष्टमी, दहीहांडी, दशहरा, कोजागिरी पूर्णिमा, तुलसी विवाह और गुरु नानक जयंती सहित क्षेत्रीय त्योहार शामिल हैं।

इन त्योहारों के दौरान भी जोखिम के आधार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। तीसरी श्रेणी में स्थानीय त्योहारों, मेलों, जुलूसों और ग्राम स्तर के उत्सवों को शामिल किया जाएगा।

चार-चरणों वाली व्यवस्था के तहत, त्योहार से 15 से 21 दिन पहले तैयारियां शुरू होंगी। इसमें जोखिम वाले इलाकों की पहचान, खाने-पीने की जगहों के बारे में जानकारी जुटाना और सैंपल लेने के लिए पहले से योजना बनाना शामिल होगा।

दूसरा चरण त्योहार से 14 दिन पहले शुरू होगा, उसमें प्रोडक्शन सेंटरों, गोदामों और ट्रांसपोर्ट की जांच और सैंपल इकट्ठा करने पर ध्यान दिया जाएगा। तीसरे चरण के तहत त्योहार के दिन, एफडीए बाजार की निगरानी करेगा, मिठाई की दुकानों और खाने-पीने की जगहों का निरीक्षण करेगा और खाद्य सुरक्षा की जांच करेगा।

चौथे चरण त्योहार के बाद 30 दिनों तक चलेगा। इसमें सैंपल की जांच, रिपोर्ट तैयार करना, कानूनी कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर असुरक्षित खाने-पीने की चीज़ों को जब्त करके उन्हें नष्ट करना शामिल होगा।

महाशिवरात्रि और नवरात्र के दौरान व्रत में खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों जैसे कुट्टू के आटे की जांच की जाएगी, जबकि ईद, रमजान, गणेशोत्सव, दिवाली और होली के दौरान दूध और डेयरी उत्पादों पर जोर दिया जाएगा।

एफडीए ने अधिकारियों को खाने के तेल पर खास ध्यान देने का निर्देश दिया है। कहा कि अगर तलने वाले तेल में टोटल पोलर कंपाउंड्स (टीपीसी) की मात्रा 25 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तो उस तेल को इंसानों के खाने लायक नहीं माना जाता है और उसे दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

महाप्रसाद, इफ्तार के खाने, अन्नदान, लंगर और भंडारे जैसे बड़े सामुदायिक आयोजनों के लिए, आयोजकों को अधिकृत फूड कैटरर्स की सेवाएं लेने का निर्देश दिया गया है।

आदेश के तहत संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारी को पहले से सूचना देना जरूरी है, और कैटरर्स के ज़रिए परोसे जाने वाले भोजन को तय सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।

एफडीए ने खाद्य व्यवसाय करने को भी निर्देश दिए हैं कि वे अपना लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन की जानकारी और क्यूआर कोड स्पष्ट तौर पर दिखाएं, कच्चा माल सिर्फ अधिकृत सप्लायर से ही खरीदें, प्रतिबंधित रंगों और इंडस्ट्रियल केमिकल का इस्तेमाल न करें।

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