दुनिया भर में ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में भरोसेमंद और कम-कार्बन वाली बिजली पैदा करने के लिए न्यूक्लियर पावर प्लांट बहुत जरूरी हैं। इसीलिए दुनिया के अलग-अलग देशों में बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाए जाते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि भारत का सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर प्लांट कौन-सा है और इसे किसने बनाया है? आइए बताते हैं।
भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र
भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Largest Nuclear Power Plant in India ) तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Kudankulam Nuclear Power Plant) है। इसकी कुल मौजूदा क्षमता 2,000 MW (जिसमें यूनिट 1 और 2, हर एक 1,000 MW पर चालू हैं)। टोटल प्लान सभी छह VVER-1000 रिएक्टर पूरे होने पर 6,000 MW तक इसकी क्षमता बढ़ाने का है।
24 साल पहले बनना शुरू हुआ
इस प्लांट का निर्माण 31 मार्च 2002 को शुरू हुआ, लेकिन स्थानीय मछुआरों के विरोध के कारण इसमें कई बार देरी हुई। इस प्लांट में रूस की सरकारी कंपनी एटमस्ट्रॉयएक्सपोर्ट और न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के सहयोग से छह VVER-1000 रिएक्टर बनाए जाने हैं, जिनकी कुल बिजली उत्पादन क्षमता 6,000 MW होगी।
बनाने पर कितना खर्च?
- यूनिट 1 और 2 : ₹22,462 करोड़
- यूनिट 3 और 4 (संशोधित लागत) : ₹68,893 करोड़
- यूनिट 5 और 6 (संशोधित लागत) : ₹69,437 करोड़
कौन करता है इसे ऑपरेट?
इस प्लांट की मालिक न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और यही कंपनी इसे ऑपरेट करती है। न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड भारत सरकार के अधीन एक पीएसयू है, जिसका मुख्यालय मुंबई, महाराष्ट्र में है।
यह पूरी तरह से भारत सरकार के स्वामित्व में है और परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन के लिए जिम्मेदार है। NPCIL का संचालन परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) द्वारा किया जाता है। यानी परोक्ष रूप से कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की मालिक भारत सरकार है।
किसे मिली बनाने की जिम्मेदारी?
कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए इंजीनियरिंग और प्रोक्योरमेंट (EP) का कॉन्ट्रैक्ट रोसाटॉम को दिया गया था, जबकि इसके निर्माण और कमीशनिंग की ज़िम्मेदारी भारतीय पक्ष की है। निर्माण का कॉन्ट्रैक्ट भारतीय कंपनी लार्सन एंड टुब्रो को मिला, जिसमें रिएक्टर बिल्डिंग, रिएक्टर ऑक्जिलरी बिल्डिंग, टरबाइन बिल्डिंग, डीजल जेनरेटर बिल्डिंग और सुरक्षा से जुड़ी अन्य इमारतों का निर्माण शामिल है।