क्या आप भी अपने नाखूनों को खूबसूरत और लंबे समय तक चमकदार बनाए रखने के लिए अक्सर ‘जेल मैनीक्योर’ कराती हैं? अगर हां, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है।
ब्रिटेन ने हाल ही में जेल नेल पॉलिश में इस्तेमाल होने वाले एक खास केमिकल टीपीओ (TPO) पर बैन लगा दिया है। बता दें, इससे पहले यूरोपीय संघ भी इस पर पाबंदी लगा चुका है।
ऐसे में, आपके मन में भी यह सवाल जरूर उठ रहा होगा कि आखिर यह केमिकल इतना खतरनाक क्यों माना जा रहा है और क्या भारत में भी नेल सैलून जाने वालों को सावधान होने की जरूरत है? आइए, इस आर्टिकल में डिटेल में समझते हैं।
TPO आखिर है क्या और यह कैसे काम करता है?
TPO का पूरा नाम Trimethylbenzoyl diphenylphosphine oxide है। इसे एक ‘फोटो-इनीशिएटर’ कहा जाता है। आसान भाषा में समझें तो, जब आप नाखूनों पर जेल पॉलिश लगवाने के बाद अपने हाथ को यूवी या एलईडी लैंप के नीचे रखती हैं, तो यह केमिकल लाइट के संपर्क में आते ही पॉलिश को तुरंत सुखाकर सख्त कर देता है।
दुनिया भर के नेल सैलून में इसका जमकर इस्तेमाल होता है। दिलचस्प बात यह है कि यह सिर्फ नेल पॉलिश में ही नहीं, बल्कि कपड़ों, खिलौनों, गद्दों, फूड पैकेजिंग वाले प्लास्टिक और यहां तक कि डेंटिस्ट द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले लाइट-क्योर्ड रेजिन में भी पाया जाता है।
ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने क्यों लगाया बैन?
ब्रिटेन ने 15 अगस्त से TPO वाले नेल पॉलिश के निर्माण और बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी है। सैलून मालिकों को अपना बचा हुआ पुराना स्टॉक खत्म करने के लिए अगले साल 14 फरवरी तक की मोहलत दी गई है, लेकिन वे नया माल नहीं मंगा सकते। इससे पहले 2025 में यूरोपीय संघ ने भी कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में इसे यह कहकर बैन कर दिया था कि यह कार्सिनोजेनिक, म्यूटाजेनिक या रीप्रोटॉक्सिक की श्रेणी में आता है।
बता दें, इसे बैन करने की मुख्य वजह पशुओं पर हुए परीक्षण हैं। चूहों पर हुए टेस्ट में सामने आया कि जब उन्हें इसकी भारी खुराक दी गई, तो उनके लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा। इसके अलावा, नर चूहों के प्रजनन अंगों पर भी इसका बहुत बुरा असर दिखा। हालांकि, बैक्टीरिया और हैम्स्टर-सेल पर हुए परीक्षणों में इसका कोई डीएनए या आनुवंशिक खतरा नहीं मिला है। फिर भी, प्रजनन क्षमता को नुकसान पहुंचाने के डर से इसे कॉस्मेटिक्स से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
क्या आपको डरने की जरूरत है?
जो ग्राहक कभी-कभार जेल मैनीक्योर कराते हैं, उनके लिए खतरा बेहद कम है क्योंकि उनका एक्सपोजर सुरक्षित सीमा से बहुत नीचे होता है। असली चिंता उन सैलून कर्मचारियों के लिए है, जो हर दिन इस केमिकल के संपर्क में आते हैं। लगातार इसे लगाने, ब्रश करने या उड़ेलने के कारण उनके शरीर में इस केमिकल के जाने का जोखिम बहुत ज्यादा होता है।
भारत में क्या है TPO का हाल?
जहां एक तरफ यूरोप और ब्रिटेन में इस पर सख्ती बरती जा रही है, वहीं भारत और अमेरिका में इस केमिकल पर फिलहाल कोई पाबंदी नहीं है। भारत के ‘कॉस्मेटिक्स नियम, 2020’ में TPO को नियंत्रित या प्रतिबंधित सामग्री की सूची में शामिल नहीं किया गया है।
इसका सीधा मतलब है कि भारतीय सैलूनों में बिकने वाले और इस्तेमाल होने वाले यूवी/एलईडी जेल सिस्टम में आज भी धड़ल्ले से TPO का इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि घर पर लगाई जाने वाली सामान्य नेल पॉलिश, जो बिना UV लैंप के सूख जाती हैं, वह लाइट-एक्टिवेटेड फॉर्मूले पर काम नहीं करतीं, इसलिए वे TPO के खतरे से पूरी तरह बाहर हैं।
कंपनियों ने पेश किया TPO का नया विकल्प
ब्रिटेन और यूरोपीय बाजारों के लिए नेल पॉलिश बनाने वाली कंपनियों ने अब TPO का एक सुरक्षित विकल्प खोज लिया है, जिसे ‘TPO-L’ कहा जाता है। यह केमिकल भी यूवी लैंप के नीचे पॉलिश को सख्त करने का काम करता है, लेकिन इसे सेहत के लिए कम खतरनाक माना गया है। विदेशों में अब जेल पॉलिश की बोतलों पर ‘TPO-free’ के लेबल देखने को मिल रहे हैं, जो ग्राहकों के लिए एक सुरक्षित विकल्प पेश करते हैं।