गोड्डा-गोमतीनगर एक्सप्रेस में कॉकरोचों का आतंक, दहशत के बीच यात्रियों ने काटी रात…

ट्रेनों में सुहाना सफर का दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है। गंदगी से परेशान यात्रियों को अब काकरोच भी डराने लगे हैं। शनिवार को गोरखपुर के रास्ते गोड्डा से गोमतीनगर जा रही 15089 नंबर की गोड्डा-गोमतीनगर एक्सप्रेस के वातानुकूलित कोचों में शाम होते ही काकरोच की भरमार हो गई।

रात आठ बजे के आसपास ट्रेन के बरौनी पहुंचते ही बर्थों पर बिछी बेडशीट पर भी काकरोचों ने कब्जा जमा लिया। बड़ी संख्या में काकरोच देख यात्री दहशत में आ गए। बच्चे और महिलाओं की परेशानी बढ़ गई। वे डर के मारे बर्थ पर बैठ नहीं पा रहे थे।

एसी थर्ड के बी फोर कोच में यात्रा कर रहीं यात्री उषा और पूर्णिमा ने त्वरित निस्तारण केंद्र के फोन नंबर 7068241412 पर शिकायत दर्ज कराई। कुछ देर बाद सफाईकर्मी आए और केमिकल का छिड़काव कर चले गए। काकरोचों पर केमिकल के छिड़काव का भी कोई असर नहीं पड़ा और वे बिना डर के घूमते रहे।

काकरोच सिर्फ घूम ही नहीं रहे थे, वे यात्रियों के शरीर पर चढ़कर घूम रहे थे। हाथ और पैर में काट भी रहे थे। डर के मारे यात्री रात भर सो नहीं पाए। बच्चे जागते रहे। यात्रियों ने बताया कि केमिकल छिड़काव के बाद भी काकरोच इधर-उधर घूमते रहे। समस्या जस की तस बनी रही।

रात में सोने के दौरान काकरोचों के काटने से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। यात्रियों ने रेलवे से ट्रेन के कोचों की बेहतर ढंग से सफाई और कीटनाशक दवा का प्रभावी छिड़काव कराने की मांग की। लेकिन, किसी ने संज्ञान नहीं लिया। यात्रियों ने कोचों की साफ-सफाई पर भी सवाल उठाए।

दरअसल, लंबी दूरी की ट्रेनों में कोचों की समुचित सफाई नहीं हो पाती। ट्रेन यार्ड में खड़ी रहती है। गंदगी के चलते काकरोच कोचों में अपना घर बना लेते हैं। जबकि, कोचों की सफाई और धुलाई के नाम पर रेलवे लाखों खर्च कर रहा है।

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