कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद के लिए चल रही खींचतान खत्म हो गई है। कांग्रेस नेता सिद्दरमैया ने गुरुवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। सिद्दरमैया ने कहा कि हाईकमान ने उनसे जो कहा, उन्होंने किया।
वर्तमान में उपमुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार राज्य के अगले मुख्यमंत्री हो सकते हैं। इस्तीफा देने से पहले मुख्यमंत्री आवास पर कैबिनेट सहयोगियों के लिए आयोजित नाश्ते पर शिवकुमार ने सिद्दरमैया के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया।
कांग्रेस हाईकमान ने सिद्दरमैया को राज्यसभा की सदस्यता का प्रस्ताव दिया है, लेकिन इसे उन्होंने ठुकरा दिया और कहा कि वह प्रदेश की राजनीति में ही सक्रिय रहना चाहते हैं। बेंगलुरु में घटनाक्रम के बाद दोनों नेता मंत्रिमंडल गठन की प्रक्रिया के लिए पार्टी हाईकमान से मिलने अलग-अलग दिल्ली रवाना हो गए।
राज्यपाल थावरचंद गहलोत के राज्य से बाहर होने के कारण लोकभवन में राज्यपाल के विशेष सचिव प्रभु शंकर को इस्तीफा सौंपने के बाद सिद्दरमैया ने प्रेस से बात की। इस दौरान उनके साथ उपमुख्यमंत्री और संभावित उत्तराधिकारी शिवकुमार और कैबिनेट के अन्य सहयोगी भी उपस्थित थे।
सिद्दरमैया ने राज्यसभा सीट का प्रस्ताव ठुकराया
77 वर्षीय सिद्दरमैया ने विश्वास जताया कि राज्यपाल संवैधानिक प्रविधानों के अनुसार उनका इस्तीफा स्वीकार कर लेंगे। साथ ही कहा, उन्होंने बार-बार स्पष्ट किया था कि जब भी हाईकमान उन्हें निर्देश देगा, वह इस्तीफा दे देंगे। हाईकमान ने दो दिन पहले उन्हें पद छोड़ने का निर्देश दिया और उसी के अनुसार उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया है।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें राज्यसभा सीट का प्रस्ताव दिया था, जिसे उन्होंने विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर दिया है। वह वरुणा सीट से विधायक के रूप में अपने कार्यकाल के शेष दो वर्षों तक प्रदेश की सक्रिय राजनीति में बने रहेंगे।
इससे पहले गुरुवार सुबह अपने आवास पर मंत्रिमंडल सहयोगियों के लिए आयोजित नाश्ते की बैठक पर सिद्दरमैया ने उन्हें त्यागपत्र देने के निर्णय से अवगत कराया और कहा कि कांग्रेस हाईकमान के निर्देशों के अनुसार शिवकुमार उनके उत्तराधिकारी होंगे।
बैठक में उपस्थित कई मंत्रियों ने यह जानकारी दी। लेकिन जब प्रेसवार्ता के दौरान अगले मुख्यमंत्री के बारे में सवाल किया गया, तो सिद्दरमैया ने कहा कि विधायक दल और हाईकमान जिसे भी तय करेगा, वही राज्य का मुख्यमंत्री होगा। शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर उनके भाई और पूर्व कांग्रेस सांसद डीके सुरेश ने कहा कि हम सभी को पार्टी के निर्णय का इंतजार करना चाहिए।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से शेयर की गई नाश्ते की बैठक की एक तस्वीर में सिद्दरमैया को भावुक शिवकुमार को गले लगाते देखा गया। एक अन्य तस्वीर में शिवकुमार को सिद्दरमैया के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेते देखा गया।
दो दिनों में साफ होगी स्थिति
पार्टी सूत्रों के अनुसार, दिल्ली प्रवास के दौरान दोनों नेताओं की हाईकमान के साथ विधायक दल के नए नेता के चयन, मंत्रिमंडल की संरचना और अन्य तौर-तरीकों पर चर्चा होने की संभावना है। अन्य मुद्दों में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद भी शामिल है, जो वर्तमान में शिवकुमार के पास है। सूत्रों ने कहा कि इन सभी मामलों पर एक-दो दिनों में स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
सिद्दरमैया के समर्थक भावुक
सिद्दरमैया के इस्तीफे के बाद उनके समर्थकों ने राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किए। उनके आधिकारिक आवास पर भी भावुक दृश्य देखने को मिले, जब समर्थकों के एक बड़े समूह ने उन्हें घेर लिया और उनसे इस्तीफा नहीं देने का आग्रह किया। शिवकुमार के अगला मुख्यमंत्री बनने के संकेतों के बाद उनके आवास के पास जश्न का माहौल देखा गया। कांग्रेस के कई नेताओं और विधायकों ने शिवकुमार के आवास पर जाकर उन्हें बधाई दी।
सीएम पद के लिए खींचतान
मई 2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए सिद्दरमैया और शिवकुमार के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा थी। तब पार्टी ने शिवकुमार को मनाकर उपमुख्यमंत्री बना दिया था। उस समय बारी-बारी से मुख्यमंत्री बनने की व्यवस्था पर सहमति की चर्चा थी, लेकिन पार्टी या दोनों नेताओं ने इस संबंध में पुष्टि नहीं की थी।
सूत्रों ने बताया कि सिद्दरमैया ने पद छोड़ने का निर्णय इसलिए लिया क्योंकि यह संदेश सीधे पार्टी के शीर्ष नेता राहुल गांधी की ओर से आया था। पार्टी ने मंगलवार को सिद्दरमैया और शिवकुमार को दिल्ली बुलाया था, जहां कांग्रेस मुख्यालय में राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल व रणदीप सुरजेवाला के साथ लगातार कई बैठकें हुई थीं।
गुरुवार को प्रेस वार्ता के दौरान सिद्दरमैया ने कहा कि उन्होंने कभी अपने मूल्यों और विचारधारा से समझौता नहीं किया और न ही कभी सत्ता या पैसे के पीछे भागे। उन्होंने कभी धन जमा करने के बारे में नहीं सोचा और उनका 50 वर्ष का राजनीतिक करियर एक खुली किताब की तरह है।