अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने का सपना देख रहे लाखों भारतीयों के बीच पिछले कुछ दिनों में भारी चिंता फैल गई है।
इसकी वजह बनी अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) की एक नई घोषणा, जिसमें कहा गया कि जो विदेशी अस्थायी रूप से अमेरिका में रह रहे हैं और ग्रीन कार्ड चाहते हैं, उन्हें आवेदन के लिए अपने देश लौटना होगा, जब तक कि कोई असाधारण परिस्थिति न हो।’
हालांकि बाद में ट्रंप प्रशासन ने सफाई दी कि यह कोई व्यापक नीति परिवर्तन नहीं है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका की कानूनी आव्रजन प्रणाली को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। खासकर भारतीय पेशेवरों, H-1B वीजा धारकों, छात्रों और परिवार-आधारित आवेदकों के लिए यह चिंता का विषय बन गया है।
आखिर बदला क्या है?
अब तक अमेरिका में रहने वाले कई लोग जैसे H-1B कर्मचारी, छात्र, अमेरिकी नागरिकों के जीवनसाथी, शरणार्थी और अन्य वैध वीजा धारक अमेरिका छोड़े बिना ही ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते थे। इस प्रक्रिया को एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस (AOS) कहा जाता है।
लेकिन USCIS की हालिया भाषा से ऐसा लगा कि अब अधिकारियों के पास यह अधिकार होगा कि वे कुछ आवेदकों को अमेरिका के भीतर ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति न दें और उन्हें अपने देश जाकर अमेरिकी दूतावास या वाणिज्य दूतावास के जरिए आवेदन करने को कहें।
यही वह पुनीत था जिसने लोगों में घबराहट पैदा की।
एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस क्यों है?
अमेरिकी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में कुल 13.56 लाख लोगों को ग्रीन कार्ड मिला। इनमें से लगभग 58% लोगों ने अमेरिका के भीतर रहते हुए एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस के जरिए ग्रीन कार्ड हासिल किया। करीब 7.82 लाख ग्रीन कार्ड केवल AOS प्रक्रिया से दिए गए। यानी ग्रीन कार्ड प्रणाली का बड़ा हिस्सा इसी व्यवस्था पर आधारित है। अगर बड़ी संख्या में लोगों को विदेश जाकर आवेदन करना पड़ा, तो इससे: लंबी देरी, वीजा की अस्वीकृति का खतरा, दोबारा अमेरिका प्रवेश पर बैन, नौकरी और परिवार से अलगाव जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
ट्रंप प्रशासन ने बाद में क्या सफाई दी?
आलोचना बढ़ने के बाद अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने कहा कि यह कोई नई नीति नहीं है। USCIS अधिकारियों के पास पहले से ही विवेकाधिकार था। प्रत्येक मामले का फैसला परिस्थितियों के आधार पर किया जाएगा। लेकिन आव्रजन विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्पष्टीकरण के बावजूद भ्रम खत्म नहीं हुआ है।
अब इंटरव्यू में पूछे जा रहे हैं नए सवाल
अमेरिकन इमिग्रेशन लॉयर्स एसोसिएशन (AILA) के अनुसार, कई USCIS अधिकारी अब ग्रीन कार्ड इंटरव्यू में आवेदकों से पूछ रहे हैं:
- आपने अमेरिका के भीतर एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस क्यों चुना?
- विदेश जाकर कांसुलर प्रक्रिय क्यों नहीं किया?
- पहले ऐसे सवाल आम नहीं थे।
कुछ मामलों में अधिकारियों ने आवेदन मंजूर कर दिए, कुछ ने अतिरिक्त दस्तावेज मांगे, जबकि कुछ ने फैसले रोक दिए। इससे यह संकेत मिल रहा है कि अब ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक ‘व्यक्तिपरक’ हो सकती है।
अब किन दस्तावेजों पर अधिक जोर होगा?
इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि अब आवेदकों को यह साबित करना होगा कि वे अमेरिका के लिए ‘सकारात्मक योगदान’ देते हैं।
इन दस्तावेजों का महत्व बढ़ सकता है:
- टैक्स रिकॉर्ड
- स्थायी रोजगार का प्रमाण
- नियोक्ता का समर्थन पत्र
- आर्थिक योगदान
- सामुदायिक संबंध
- परिवारिक जुड़ाव
- अच्छे आचरण का प्रमाण
सबसे ज्यादा असर किस पर पड़ सकता है?
- परिवार आधारित ग्रीन कार्ड आवेदक
- जो टूरिस्ट या छात्र वीजा पर अमेरिका आए
- बाद में अमेरिकी नागरिक से विवाह किया
- ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर रहे हैं।
अगर इन्हें अमेरिका छोड़ने को कहा गया, तो कई लोग ’10 साल के पुनः प्रवेश प्रतिबंध’ में फंस सकते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति ने वीजा अवधि से अधिक समय अमेरिका में बिताया है और वह देश छोड़ता है, तो उसे दोबारा प्रवेश पर लंबा प्रतिबंध झेलना पड़ सकता है।
H-1B वीजा धारकों पर क्या असर होगा?
शुरुआती घोषणा के बाद टेक कंपनियों और भारतीय पेशेवरों में सबसे अधिक चिंता देखी गई। लेकिन कई विशेषज्ञ मानते हैं कि H-1B वीजा ‘dual intent’ वीजा है, यानी व्यक्ति अस्थायी रूप से रहते हुए स्थायी नागरिकता की कोशिश कर सकता है। इसलिए संभव है कि अधिकांश H-1B मामलों में प्रक्रिया सामान्य रूप से जारी रहे। फिर भी अतिरिक्त जांच, अधिक दस्तावेज, लंबी प्रक्रिया और अधिकारी के विवेकाधिकार का जोखिम बढ़ सकता है
क्या है कारण?
- प्रति देश ग्रीन कार्ड सीमा
- H-1B पर भारी निर्भरता
- टेक सेक्टर में भारतीयों की बड़ी संख्या
कुछ श्रेणियों में भारतीयों को ग्रीन कार्ड के लिए 20-50 साल तक इंतजार करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि Adjustment of Status प्रक्रिया भी अनिश्चित हो जाए, तो स्थिति और कठिन हो सकती है।
छात्रों के लिए भी नई चिंता
ट्रंप प्रशासन F-1 छात्र वीज़ा नियमों में भी बदलाव पर विचार कर रहा है। अभी छात्र “Duration of Status” नियम के तहत पढ़ाई पूरी होने तक रह सकते हैं।
प्रस्तावित बदलाव
- निश्चित समय सीमा वाला वीजा
- समय बढ़ाने के लिए अतिरिक्त मंजूरी की आवश्यकता
इससे प्रभावित हो सकते हैं:
- OPT पर काम करने वाले छात्र
- H-1B लॉटरी का इंतजार कर रहे भारतीय छात्र
- Day 1 CPT प्रोग्राम का उपयोग करने वाले पेशेवर
- AI और नौकरी बाजार का नया दबाव
विशेषज्ञों का कहना है कि टेक कंपनियां AI आधारित सिस्टम अपना रही हैं, H-1B अवसरों में अनिश्चितता बढ़ रही है और कई भारतीय पेशेवर अब अमेरिका में घर खरीदने तक से पीछे हट रहे हैं।
रियल एस्टेट बाजार पर असर
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, डलास-फोर्ट वर्थ क्षेत्र में भारतीय टेक पेशेवरों ने हाउसिंग बूम पैदा किया था।कई बिल्डर भारतीय परिवारों के लिए विशेष पूजा कक्ष तक डिजाइन करते थे। लेकिन अब भारतीय खरीदारों की संख्या तेजी से घटी है, कई लोग घर खरीदने की बजाय बेच रहे हैं, कुछ अमेरिका छोड़ने पर विचार कर रहे हैं।
कंपनियां भी चिंतित
अमेरिकी उद्योग समूहों का कहना है कि कानूनी आव्रजन में अनिश्चितता से कंपनियों को नुकसान होगा, टेक, हेल्थकेयर और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में पहले से श्रमिकों की कमी है, वैश्विक प्रतिभा आकर्षित करना कठिन हो सकता है। क्या यह केवल ‘संदेश’ था या बड़ी नीति बदलाव की शुरुआत? यही सबसे बड़ा सवाल है।
ट्रंप प्रशासन कह रहा है कि Adjustment of Status खत्म नहीं हुआ सिर्फ अधिकारियों को विवेकाधिकार की याद दिलाई गई। लेकिन आलोचकों का कहना है नीति चाहे बदले या न बदले डर और अनिश्चितता पैदा हो चुकी है।
इमिग्रेशन वकीलों के अनुसार
- कई लोग आवेदन टाल रहे हैं,
- कंपनियां स्पॉन्सरशिप पर पुनर्विचार कर रही हैं
- और परिवार अमेरिका में भविष्य को लेकर असमंजस में हैं।
ग्रीन कार्ड पाने की अमेरिकी व्यवस्था लंबे समय से दुनिया भर के पेशेवरों और परिवारों के लिए स्थिरता और अवसर का प्रतीक रही है। लेकिन USCIS की हालिया घोषणा और उसके बाद पैदा हुई अनिश्चितता ने यह दिखा दिया है कि अमेरिकी कानूनी आव्रजन प्रणाली अब पहले की तुलना में कहीं अधिक कठोर और अप्रत्याशित हो सकती है।