कभी था साधारण किचन गार्डन, आज 70 लाख फूलों से महकता है नीदरलैंड्स का क्यूकेनहॉफ…

क्या आपने कभी ऐसी जगह की कल्पना की है जहां आपकी नजर जहां तक जाए, वहां सिर्फ रंग-बिरंगे फूल ही फूल हों? नीदरलैंड्स के लिस्से शहर में स्थित ‘केउकेनहॉफ’ एक ऐसी ही जगह है।

इसे प्यार से ‘गार्डन ऑफ यूरोप’ भी कहा जाता है और यह दुनिया का सबसे बड़ा और मशहूर फूलों का बगीचा है। आइए जानते हैं इस खूबसूरत उद्यान से जुड़ी कुछ बेहद खास बातें।

साल में सिर्फ 8 हफ्तों का जादू

यह शानदार स्प्रिंग गार्डन 32 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह पूरे साल नहीं खुलता। आप वसंत ऋतु के दौरान (मध्य-मार्च से मध्य-मई के बीच) सिर्फ 8 हफ्तों के लिए ही इस नजारे का लुत्फ उठा सकते हैं। यहां पर्यटकों के लिए हर साल एक नई थीम तैयार की जाती है, जिससे हर बार एक बिल्कुल नया और ताजा अनुभव मिलता है।

एक ‘किचन गार्डन’ से विश्व प्रसिद्ध उद्यान तक का सफर

इस बगीचे का इतिहास बहुत दिलचस्प है। 15वीं शताब्दी में यह जगह किसी स्थानीय निवासी का साधारण-सा ‘किचन गार्डन’ हुआ करती थी।

सालों बाद, 1949 में इसे एक सार्वजनिक फूल प्रदर्शनी का रूप दिया गया। इसके अगले ही साल, 1950 में जब इसे पहली बार आम जनता के लिए खोला गया, तो इसने अपने पहले ही वर्ष में 3 लाख से ज्यादा लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया।

40 मालियों की मेहनत और 70 लाख फूल

केउकेनहॉफ में हर साल 70 लाख से ज्यादा ट्यूलिप और अन्य किस्मों के खूबसूरत फूल खिलते हैं। यह कोई कुदरती चमत्कार नहीं, बल्कि 40 मालियों की कड़ी मेहनत का नतीजा है।

हर साल शरद ऋतु में ये माली जमीन के नीचे 70 लाख ‘बल्ब’ लगाते हैं। (बल्ब पौधे का वह निचला हिस्सा होता है जो जमीन के अंदर रहता है और जिससे एक नया पौधा जन्म लेता है)। ये सभी बल्ब 100 से अधिक उत्पादकों द्वारा इस पार्क को दान में दिए जाते हैं।

सिर्फ ट्यूलिप ही नहीं, और भी बहुत कुछ

यहां अकेले ट्यूलिप की ही लगभग 800 से अधिक किस्में मौजूद हैं। इसके अलावा, इस बगीचे में गुलाब, लिली, डैफोडिल, हाइसिंथ, कार्नेशन और आइरिस जैसे खूबसूरत फूलों की भरमार है। फूलों की इस मनमोहक छटा और खुशबू के साथ-साथ आप यहां नीदरलैंड्स की पारंपरिक पवनचक्कियों का भी दीदार कर सकते हैं।

नीदरलैंड्स की शान और ‘ट्यूलिप मैनिया’

ट्यूलिप के फूल नीदरलैंड्स की राष्ट्रीय पहचान का एक अहम हिस्सा हैं। आज भी ये वहां के पर्यटन और अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

इनका इतिहास भी काफी रोचक रहा है, 17वीं सदी में एक समय ऐसा भी आया था जब ट्यूलिप की कीमतें अचानक आसमान छूने लगी थीं। इतिहास में इस अनोखी घटना को ‘ट्यूलिप मैनिया’ के नाम से जाना जाता है।

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