साइबर ठगों को 21 हजार सिम उपलब्ध कराने वाले वोडाफोन के एरिया सेल्स मैनेजर बीनु विद्याधरन को सीबीआइ ने गिरफ्तार कर लिया है।
सीबीआइ के अनुसार एक निजी कंपनी का कर्मचारी बताकर विद्याधरन वोडाफोन का सिम जारी कराता था और फिर उसे साइबर ठगों को उपलब्ध कराता था।
सीबीआई के अनुसार दिल्ली सहित पूरे एनसीआर में साइबर ठगों के खिलाफ चल रहे आपरेशन चक्र-पांच के तहत यह कार्रवाई की गई है। इस मामले में पहले ही तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दिल्ली में वोडाफोन के एरिया सेल्स मैनेजर के रूप में विद्याधरन को थोक (बल्क) में सिम जारी करने का अधिकार था।
किसका नाम का करता था इस्तेमाल?
इसका दुरुपयोग करते हुए वह लार्ड शिवा महावीरा सर्विसेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के कर्मचारियों के नाम बड़ी संख्या में सिम जारी करता था। सिम के केवाईसी के लिए कई परिवारों के सदस्यों के नाम और आधार कार्ड भी इस्तेमाल करता था।
सीबीआई को ऐसे ही बेंगेलुरु के परिवार के बारे में जानकारी मिली है और उनसे पूछताछ की जा रही है। विद्याधरन के कार्यालय से उनके आधार कार्ड के फोटोकापी भी मिले हैं।
एनसीआर में फैले साइबर ठग विद्याधरन से ऐसे सिम कार्ड खरीदते थे। इन सिम कार्ड का इस्तेमाल बल्क मैसेस भेजकर लोगों को फंसाने के लिए किया जाता था।
इन सीम से होती थी साइबर ठगी की कॉल
इसके साथ ही इन सिम से साइबर ठग काल भी करते थे। जिसमें लोगों को लोन और निवेश के प्रलोभन दिये जाते थे। कुछ सिम के धमकी और जबरन वसूली के लिए भी इस्तेमाल किये जाने के सबूत मिले हैं।
एक बार साइबर ठगों के झांसे में आने के बाद लोगों से उनकी विस्तृत जानकारी ली जाती थी या फिर दिए गए लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा जाता था।
जिनमें कई लोगों से लाखों रूपये और कुछ मामलों में करोड़ों की ठगी हो जाती थी। साइबर ठगी के इन पैटर्न और उनमें इस्तेमाल सिम की जांच के दौरान सीबीआई वोडाफोन के दिल्ली के एरिया सेल्स मैनेजर की संलिप्तता की जानकारी मिली।