अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर यूएस सांसदों ने एक बार फिर चिंता जाहिर की है। ये नई चिंताएं ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बातों के वायरल होने के बाद आई हैं।
सीनेटर रिक स्कॉट ने एक्स पर इस्लामाबाद की भूमिका को लेकर चिंता जताई और कहा कि वॉशिंगटन को यह याद रखना चाहिए कि इस सब के बीच असल में पाकिस्तान क्या है।
‘ज्यादा काबिल नहीं पाकिस्तान’
स्कॉट ने कहा, “हम एक ऐसे देश की बात कर रहे हैं जहां बिन लादेन एक दशक तक छिपा रहा, जहां ईशनिंदा के भेदभावपूर्ण कानूनों का इस्तेमाल करके ईसाइयों को परेशान किया जाता है और जहां के प्रधानमंत्री ने हाल ही में ईरान के उस तानाशाह की तारीफ की है जिसने बड़े पैमाने पर नरसंहार और हत्याएं की थीं।” उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान इस विवाद में ‘मध्यस्थता’ करने के लिए हमास को पनाह देने वाले कतर से ज्यादा काबिल नहीं है।
सीनेटर स्कॉट ने क्यों कही ये बात?
फ्लोरिडा के सीनेटर की एक्स पर यह टिप्पणी तब आई है जब मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर की तारीफ करते हुए शहबाज शरीफ का एक वीडियो वायरल हुआ। मेमरी टीवी (Memri TV) द्वारा शेयर किए गए वीडियो में शरीफ ने खामेनेई को महान विद्वान और नेता बताया।
शरीफ ने वीडियो क्लिप में कहा, “वह एक महान विद्वान और नेता थे, जिन्होंने मजबूती, हिम्मत, सब्र और दूरदर्शिता दिखाई और पूरी लगन और अटूट निष्ठा के साथ ईरान की सेवा की। दुनिया भर के लाखों मुसलमान उन्हें याद रखेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “पाकिस्तान और ईरान दो भाई जैसे देश हैं और हमारे दिल एक साथ धड़कते हैं। हम साथ खड़े रहेंगे और हर हालात में साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे।”
फॉक्स न्यूज के कमेंटेटर ने शरीफ को कहा मसखरा
वीडियो शेयर किए जाने के बाद फॉक्स न्यूज के कमेंटेटर मार्क लेविन ने भी शरीफ पर निशाना साधते हुए कहा, “यह मसखरा ईरान के साथ हमारे मध्यस्थों में से एक था! यह बात सोच से परे है। अमेरिका, हमें अब संभल जाना चाहिए।”
अमेरिकी सांसद पहले भी जाहिर कर चुके हैं चिंता
यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी सांसदों ने युद्ध में मध्यस्थता करने में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर चिंता जताई है। ट्रंप के करीबी सहयोगी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी सोशल मीडिया और कांग्रेस की सुनवाई के दौरान अपनी चिंताएं जाहिर कीं।
ग्राहम ने मई में एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “मुझे काफी समय से यह साफ दिख रहा है कि मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान का होना काफी समस्या वाली बात है। इजरायल के प्रति उनकी दुश्मनी बहुत पुरानी है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि पाकिस्तानी एयर बेस पर ईरानी सैन्य विमान रखे जा रहे हैं और इजरायल के खिलाफ पाकिस्तान के बड़े अधिकारियों के पुराने बयान चिंताजनक हैं।”
रिपब्लिकन सीनेटर का यह बयान पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि इस्लामाबाद अब्राहम समझौते में शामिल नहीं होगा।