उत्तराखंड में बच्चों में बढ़ रहे टाइप-1 डायबिटीज के मामले, कम उम्र में मधुमेह ने बढ़ाई चिंता…

 उत्तराखंड की जीवनशैली कभी स्वास्थ्य के लिहाज से सबसे सुरक्षित मानी जाती थी, लेकिन अब यहां पर्वतीय इलाकों में भी बच्चे सुरक्षित नहीं रहे। टाइप-1 डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी बच्चों को अपनी चपेट में ले रही है।

राज्य में 40 हजार से अधिक बच्चे डायबिटीज से जूझ रहे हैं। इनमें 4000 से अधिक टाइप-1 डायबिटीज से ग्रसित हैं। एनएचएम के स्क्रीनिंग अभियान में इस तरह के चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं। यह भी सामने आया कि पिछले पांच वर्षों में राज्य में डायबिटीज मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी और ऋषिकेश जैसे शहरी क्षेत्रों में टाइप-1 डायबिटीज के मामलों की पहचान तेजी से हो रही है, लेकिन पहाड़ों में आज भी बार-बार प्यास लगना, तेजी से वजन घटना, अत्यधिक थकान और बार-बार पेशाब आने जैसे लक्षणों को सामान्य कमजोरी समझ लिया जाता है।

इसी बढ़ती चिंता के बीच उत्तराखंड में बच्चों के लिए विशेष गुब्बारा क्लीनिक की शुरुआत की गई है। दून के दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में टाइप-1 डायबिटीज पीड़ित बच्चों के लिए विशेष क्लीनिक शुरू किया गया है।

यहां बच्चों की मुफ्त जांच, ब्लड शुगर निगरानी, परामर्श और नियमित फालोअप की सुविधा दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार विकासनगर और रायपुर क्षेत्र में भी ऐसे क्लीनिक शुरू करने की तैयारी है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय गंभीर

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बच्चों में मधुमेह मेलिटस की जांच, उपचार और देखभाल के लिए राष्ट्रीय मार्गदर्शन दस्तावेज जारी किया है। इसके तहत जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग, मुफ्त इंसुलिन उपचार, ग्लूकोमीटर, टेस्ट स्ट्रिप्स व नियमित निगरानी जैसी सुविधाओं को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़ने की योजना है।

4टी माडल से पहचान

नई गाइडलाइन में “4टी” माडल – टायलेट, थर्स्ट, टायर्डनेस और थिननेस के जरिए शुरुआती लक्षणों की पहचान पर जोर दिया गया है। यह मानना है कि यदि स्कूलों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्करों और अभिभावकों को इन संकेतों के प्रति जागरूक किया जाए तो पहाड़ के दूरस्थ गांवों में रहने वाले बच्चों तक समय पर इलाज पहुंचाया जा सकेगा।

जागरूकता की कमी व समय पर जांच न होने से उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बच्चों में बढ़ रहे डायबिटीज के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। एनएचएम के तहत बच्चों की स्क्रीनिंग का भी अभियान चलाया जा रहा है, बच्चों को नियमित उपचार और निगरानी से जोड़ा गया है।

–डा. रश्मि पंत, निदेशक, एनएचएम

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