अमेरिका की अदालत ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रसिद्ध केनेडी सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स का नाम बदलकर राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के नाम पर रखना पूरी तरह गैरकानूनी था। कोर्ट ने आदेश दिया है कि इमारत से ट्रंप का नाम तुरंत हटाया जाए।
इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की है कि वे वाशिंगटन स्थित इस आर्ट्स वेन्यू से अपना नियंत्रण छोड़ रहे हैं। गौरतलब है कि पिछले साल अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ट्रंप ने खुद को इसका अध्यक्ष नियुक्त कर इस पर नियंत्रण कर लिया था।
बोर्ड ने पार की अपनी कानूनी सीमा
न्यायाधीश क्रिस्टोफर कूपर ने फैसले में कहा कि अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि बोर्ड ने एकतरफा फैसला लेते हुए केनेडी सेंटर का नाम राष्ट्रपति ट्रंप के नाम पर रखकर अपनी वैधानिक सीमाओं को पार किया है।
अमेरिकी राजधानी के केंद्र में स्थित इस प्रतिष्ठित कला केंद्र का नाम अमेरिका के दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी के सम्मान में रखा गया था। लेकिन पिछले साल दिसंबर में केंद्र के गवर्निंग बोर्ड ने एक प्रस्ताव पास कर इसका नाम बदलकर ट्रंप केनेडी सेंटर करने के पक्ष में मतदान किया था।
इसके तुरंत बाद, केनेडी के नाम के ठीक ऊपर बड़े सुनहरे अक्षरों में ट्रंप का नाम इमारत के मुख्य हिस्से पर लिखवा दिया गया था।
ट्रंप प्रशासन को मिला 14 दिनों का समय
न्यायाधीश कूपर ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस केंद्र का नाम बदलने का अधिकार सिर्फ अमेरिकी संसद के पास है। कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को इमारत के मुख्य हिस्से और वेन्यू से जुड़ी सभी सामग्रियों से 14 दिनों के भीतर ट्रंप का नाम हटाने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि कांग्रेस ने केनेडी सेंटर को नाम दिया था, केवल कांग्रेस ही इसे बदल सकती है। इसके साथ ही, जज कूपर ने ट्रंप की उस योजना पर भी अस्थायी रोक लगा दी है जिसके तहत मरम्मत और नवीनीकरण के नाम पर जुलाई से इस केंद्र को दो साल के लिए बंद किया जाना था।
ट्रंप ने निकाली भड़ास
इस अदालती झटके के बाद डोनल्ड ट्रंप ने जज पर जमकर निशाना साधा और सोशल मीडिया पर लिखा कि वे इस मरते हुए संस्थान से अब अपना हाथ खींच रहे हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि हम इस असफल संस्थान को वापस कांग्रेस को सौंपने के लिए उनके साथ काम करेंगे ताकि वे तय कर सकें कि इसका क्या करना है।
जब तक मैं वह काम करने के लिए स्वतंत्र नहीं हूं जो मैं किसी भी अन्य व्यक्ति से बेहतर करता हूं। यानी इस संस्थान को शारीरिक, वित्तीय और कलात्मक रूप से वापस खड़ा करना तब तक मेरी ऐसी किसी निराशाजनक यात्रा में कोई दिलचस्पी नहीं है।
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप का यह लंबा बयान ऐसे समय में आया जब पूरी दुनिया ईरान शांति समझौते को लेकर किसी संभावित बड़ी घोषणा का इंतजार कर रही थी।
अमेरिकी परंपराओं को बदलने की कोशिशें
जनवरी 2025 में अपने दूसरे कार्यकाल के लिए वापसी के बाद से ही डोनल्ड ट्रंप सरकारी और आधिकारिक स्थानों पर अपना नाम और तस्वीरें लगाने के लिए लगातार कदम उठा रहे हैं, जो अमेरिकी राजनीतिक परंपराओं के बिल्कुल विपरीत है। अब बंद हो चुके यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस का नाम बदलकर पहले ही ट्रंप के नाम पर रखा जा चुका है। न्याय विभाग और कृषि विभाग के बाहर बड़े-बड़े बैनरों पर ट्रंप का चेहरा लगा हुआ है।
ट्रंप प्रशासन अमेरिका की आजादी की 250वीं वर्षगांठ के मौके पर $250 के नए नोट पर ट्रंप की तस्वीर छापने की कोशिशों में जुटा है। इसके अलावा, एक और पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए ट्रंप ने बिना किसी सार्वजनिक बहस या पूर्व चेतावनी के व्हाइट हाउस के ‘ईस्ट विंग’ को ढहाने का आदेश दे दिया, ताकि वहां एक विशाल बॉलरूम बनाया जा सके।