ट्रंप की रूस के तेल पर दोहरी नीति? भारत को टैरिफ की धमकी, बेलारूस के साथ डील पर बढ़े सवाल…

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का दोहरा रुख सामने आ रहा है। अमेरिका ने जहां एक ऐसा बिल साइन किया कि जो भी देश रूस से तेल खरीदेंगे, उन पर 100% टैरिफ लगेगा, लेकिन वहीं सोमवार को ट्रंप ने रूस के करीबी बेलारूस से खाद (पोटाश) को लेकर डील फाइनल की है।

कनाडा के साथ हुए विवाद के बाद ट्रंप ने एलान किया कि वाशिंगटन बेलारूस से पोटाश खरीदने के लिए एक बड़ी डील पर काम कर रहा है। यह पोटाश उस कीमत से काफी कम दाम पर खरीदा जाएगा जो वॉशिंगटन अभी ओटावा को देता है।

ट्रंप का दोहरा रवैया

इवान फीगेनबाम ने रूसी एनर्जी को लेकर भारत पर वाशिंगटन के दबाव और बेलारूसी पोटाश खरीदने की ट्रंप की इच्छा के बीच विरोधाभास की ओर इशारा किया है।

इवान फीगेनबाम ने कहा, ‘दोहरे रवैये और दिखावटी पाखंड से बातचीत करने वाले पार्टनर के तौर पर अमेरिका की छवि पर असर पड़ सकता है, लेकिन जैसा कि MAGA बॉस की कई घोषणाओं के मामले में आम बात है, ऐसा लगता है कि उन्होंने इस मुद्दे पर जल्दबाजी में कदम उठाया है।’

इवान ने आगे कहा, ‘बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने कहा कि पश्चिमी बाजारों के लिए बहुत कम या कोई अतिरिक्त पोटाश उपलब्ध नहीं है और उनके देश का उत्पादन पहले से ही कॉन्ट्रैक्ट के तहत तय है।’

मिन्स्क से मिली खबरों के मुताबिक, लुकाशेंको ने कहा, ‘अगर हम दूसरे बाजारों को सप्लाई करना भी चाहें, तो हमारे पास उतनी मात्रा में पोटाश नहीं है।’

क्या रूस से हाथ मिलाएगा अमेरिका?

ट्रंप ने बेलारूस से डील को अमेरिकी किसानों के लिए अच्छी खबर बताया, लेकिन अमेरिका के इस कदम का असर भारत पर पड़ सकता है, क्योंकि बेलारूस भारतीय कृषि बाजार में भी पोटाश का एक स्थापित सप्लायर है।

कनाडा, रूस और बेलारूस अंतरराष्ट्रीय पोटाश बाजार में प्रमुख खिलाड़ी हैं। अकेले कनाडा दुनिया भर में होने वाली सप्लाई का लगभग एक-तिहाई हिस्सा सप्लाई करता है और अमेरिका के लिए सबसे बड़ा सप्लायर है।

ट्रंप की इस चाल का साफ मतलब यह है कि एक बड़े सप्लायर के साथ ट्रेड वॉर का इस्तेमाल करके दूसरे सप्लायर से फायदा उठाना, जो एक ऐसे भू-राजनीतिक विरोधी के साथ जुड़ा हुआ है जिसे अक्सर पिछले दरवाजे से मदद मिलती रहती है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि बेलारूस चारों तरफ से जमीन से घिरा हुआ देश है और यूरोप के प्रतिबंधों ने उसके पारंपरिक एक्सपोर्ट रूट को सीमित कर दिया है।

अगर अमेरिका को बेलारूस से बड़ी मात्रा में पोटाश मंगाना हो, तो लॉजिस्टिक्स से जुड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इसके लिए रूस के इंफ्रास्ट्रक्चर और बंदरगाहों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है, लेकिन ट्रंप के लिए ये वही रूस होगा, जिस पर वे कई सालों से यूक्रेन के साथ युद्ध खत्म करने के लिए दबाव बना रहे हैं।

क्यों जरूरी है पोटाश?

पोटाश तेल या गैस जैसा तो नहीं है, लेकिन खेती में इसका महत्व भी वैसा ही रणनीतिक है। नाइट्रोजन और फॉस्फोरस के साथ पोटेशियम पौधों के लिए तीन मुख्य पोषक तत्वों में से एक है।

यह पानी सोखने, प्रकाश संश्लेषण और एंजाइम की गतिविधि को नियंत्रित करने में मदद करता है और फसल की गुणवत्ता, बीमारी से लड़ने की क्षमता और पैदावार को बेहतर बनाता है और दुनिया भर में इसका उत्पादन कुछ ही देशों तक सीमित है।

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