चार साल से ज्यादा समय से यूक्रेन और रूस के बीच जारी भीषण संघर्ष दिन-प्रतिदिन और भयावह होता जा रहा है। दूसरी ओर अब इस संघर्ष में नया मोड़ तब आया, जब बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने यूक्रेन को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला एलान किया।
नाटो समिट के दौरान उन्होंने घोषणा की है कि अमेरिका, यूक्रेन को अपने सबसे आधुनिक हवाई रक्षा तंत्र ‘पैट्रियट’ को खुद बनाने का लाइसेंस देने जा रहा है। रूस के साथ चल रहे युद्ध के बीच इसे यूक्रेन के लिए एक गेम-चेंजर कदम माना जा रहा है।
ट्रंप ने अचानक क्यों लिया यह फैसला?
इस बात को ऐसे समझिए कि यूक्रेन पिछले चार साल से रूस के खिलाफ युद्ध लड़ रहा है। यूक्रेन ने ड्रोन हमलों को तो काफी हद तक रोक लिया है, लेकिन रूस की बैलिस्टिक मिसाइलें उसके लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनी हुई हैं। ये मिसाइलें बहुत तेज रफ्तार से और सीधे ऊपर से नीचे की तरफ आती हैं, जिससे इन्हें रोकना बेहद मुश्किल होता है।
हाल ही में रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर कई बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए, जिनमें एक साथ कई बेकसूर लोग मारे गए। कारण है कि यूक्रेन के पास इन मिसाइलों को रोकने वाले ‘पैट्रियट इंटरसेप्टर’ मिसाइलों की भारी कमी हो गई थी। इसी कमी को दूर करने के लिए यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अमेरिका से लाइसेंस मांगा था, जिसे अब ट्रंप ने मंजूरी दे दी।
अब समझिए क्या है पैट्रियट सिस्टम और यह कैसे काम करता है?
बता दें कि ‘पैट्रियट’ का पूरा नाम ‘फेज्ड एरे ट्रैकिंग राडार फॉर इंटरसेप्ट ऑन टारगेट’ है। यह दुनिया के सबसे महंगे और अचूक मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स में से एक है। इसका शक्तिशाली राडार 150 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन की मिसाइल या लड़ाकू विमान का पता लगा लेता है।
इसके बाद इसका कमांड सेंटर दुश्मन की मिसाइल की रफ्तार और रास्ता तय करता है और हवा में ही उसे तबाह करने के लिए अपनी मिसाइल दाग देता है।इसके मुख्य रूप से दो वर्जन हैं-PAC-2, जो दुश्मन की मिसाइल के पास जाकर फटता है और नया PAC-3, जो सीधे दुश्मन की मिसाइल से टकराकर उसे नष्ट कर देता है।
लाइसेंस मिलने के बाद भी यूक्रेन का रास्ता नहीं होगा आसान
गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका की तरफ से यूक्रेन को इस मिसाइल को बनाने के लाइसेंस की मंजूरी के बाद भी यूक्रेन के लिए रास्ता आसान नहीं होने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि लाइसेंस मिलना एक बड़ी बात है, लेकिन यूक्रेन के लिए इसे तुरंत बनाना नामुमकिन सा है।
कारण है कि पैट्रियट को अमेरिकी कंपनियां ‘रेथियॉन’ और ‘लॉकहीड मार्टिन’ बनाती हैं। इसकी तकनीक इतनी जटिल है कि यूक्रेन इसे रातों-रात नहीं समझ सकता। यूक्रेन की धरती पर इस मिसाइल की फैक्ट्री लगाना सुरक्षित नहीं है, क्योंकि रूस इसे तुरंत निशाना बना सकता है। इसलिए माना जा रहा है कि यह फैक्ट्री यूक्रेन के बजाय किसी अन्य यूरोपीय देश में लगाई जाएगी।
अमरिका करेगा कुछ मिसाइलें सप्लाई
इसके अलावा फैक्ट्री बनने और उत्पादन शुरू होने में लंबा समय लगेगा, जबकि यूक्रेन को मिसाइलों की जरूरत आज है। हालांकि, ट्रंप ने भरोसा दिया है कि जब तक यूक्रेन की अपनी क्षमता तैयार नहीं होती, अमेरिका तुरंत कुछ मिसाइलें सप्लाई करेगा।
अब समझिए यह इतना महंगा क्यों है?
इसके इतर पैट्रियट सिस्टम की कीमत भी यूक्रेन के लिए चिंता का विषय बन सकता है। अब ये सिस्टम इतना महंगा क्यों है इस बात को ऐसे समझिए कि इसके एक पूरे सिस्टम (बैटरी) की लागत लगभग 8,300 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इसकी महज एक PAC-3 मिसाइल की कीमत लगभग 34 करोड़ रुपये है।
अमेरिका के पास भी इसकी सीमित संख्या लगभग 60 से 90 बैटरियां है और अमेरिका को अपनी सुरक्षा के लिए भी इनकी जरूरत है। पूरी दुनिया में इसकी मांग इतनी बढ़ गई है कि अमेरिकी फैक्ट्रियां भी उतनी तेजी से इसे नहीं बना पा रही हैं।