तमिलनाडु में गोकशी पर ‘सुप्रीम’ सुनवाई, विजय सरकार की याचिका के बाद मद्रास हाई कोर्ट के फैसले पर रोक…

तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय अगुवाई वाली सरकार को गो-हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के गो-हत्या पर रोक लगाने वाले आदेश पर स्टे लगा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर स्टे लगाते हुए कहा कि इस आदेश में सुधार की जरूरत है।

तमिलनाडु की विजय सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के गो-हत्या के आदेश के खिलाफ सुप्रमी कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन दायर की थी।

मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने तर्क दिया कि जब कानून कुछ खास तरह की गायों को तय जगहों पर काटने की इजाजत देता है, तो कानूनी प्रावधान के उलट कोई न्यायिक निर्देश नहीं दिया जा सकता है।

बता दें कि मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु में गाय और बछड़ों के वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया था कि बकरीद या किसी अन्य दिन पूरे राज्य में कहीं भी गोवंश की हत्या न हो।

हाई कोर्ट का यह आदेश जस्टिस जी.आर स्वामीनाथन और जस्टिव वी. लक्ष्मीनारायण की डिवीजन बेंच ने दिया था। यह आदेश 1976 के उस आदेश पर आधारित था जिसमें दूध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए गो-हत्या पर रोक लगाई गई थी।

जस्टिस स्वामीनाथन ने इस बार पर जोर दिया था कि संविधान का अनुच्छेद 48 राज्य से यह अपेक्षा करता है कि वह गायों, बछड़ों और दूध देने वाले या बोझा ढोने वाले अन्य मवेशियों की हत्या पर रोक लगाने के लिए कदम उठाए।

इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया था कि संविधान सभा में हुई बहस के दौरान भी यह बात कही गई थी कि गाय एक पूजनीय जानवर है और भगवान कृष्ण के समय से ही हमारी सभ्यता से जुड़ी रही है।

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