गर्मी से राहत के लिए कश्मीर पहुंचे पर्यटक, पहलगाम-श्रीनगर की बजाय राजदान टॉप और गुरेज में बर्फीले नज़ारों का लिया आनंद…

देशभर में 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचते पारे ने पर्यटकों को कश्मीर की ठंडी वादियों का रुख करने पर मजबूर कर दिया है। लेकिन इस बार ट्रेंड बदला है।

गुलमर्ग और पहलगाम जैसे भीड़भाड़ वाले स्थलों की बजाय सैलानी अब राजदान टॉप, गुरेज घाटी, तुलैल, बंगस घाटी, दोबजन, अहरबल और गुगल डारा जैसे कम प्रसिद्ध लेकिन बेहद खूबसूरत स्थलों को चुन रहे हैं। यहां की शांति, अछूती प्रकृति और मई में भी बर्फ से ढकी चोटियां पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर रही हैं।

आपको बता दें कि बंगस, गोगलडारा, दोबजन, तुलैल, सोनमर्ग, गुरेज आदि जैसे इन ऊंचाई वाले पर्यटन स्थल को पर्यटन उद्योग ने चंद वर्ष पहले ही पर्यटन के मानचित्र पर लाया था और इनकी सुंदरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि संबंधित विभाग द्वारा गुमनामी की चादर औढ़े इन पर्यटन स्थलों को पर्यटन के मानचित्र पर लाने के साथ ही यह पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन गए।

राजदान टॉप में 3-4 फीट बर्फ में खेल रहे पर्यटक

बांडीपोरा को गुरेज घाटी से जोड़ने वाला राजदान टॉप इस सीजन का सबसे बड़ा आकर्षण बना है। 3-4 फीट बर्फ की मोटी चादर पर सूरज की किरणें पड़ते ही ऐसा लगता है जैसे सफेद दुपट्टे पर लाखों सितारे टंके हों। दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश से आए पर्यटक यहां बर्फ में खेलते, फोटो खिंचवाते और ठंड का लुत्फ उठाते दिख रहे हैं। दिल्ली से परिवार संग आए उमेश ने बताया, “गर्मी से बचने गुरेज आए। सुना था यहां अभी बर्फ है, इसलिए पहलगाम छोड़ दिया। मई में बर्फ देखना किसी जादू से कम नहीं।”

प्रकृति प्रेमियों की पहली पसंद बनी बंगस घाटी

पहले सर्दियों में बंद रहने वाला सोनमर्ग अब ऑल वेदर टूरिस्ट रिजॉर्ट बनने के बाद गर्मी-सर्दी दोनों में गुलजार है। श्री अमरनाथ यात्रा का प्रमुख मार्ग होने के साथ-साथ यहां टट्टू की सवारी और झरनों का आनंद लेने वालों की भीड़ है। वहीं हंदवाड़ा की बंगस घाटी चीड़ के जंगलों और मखमली घास के मैदानों के साथ शांति चाहने वालों का ठिकाना बनी है। आंध्र प्रदेश से आए अर्जुन ने कहा, “बंगस क्लासिक टूरिस्ट प्लेस है।

सुविधाएं कम हैं, रास्ता मुश्किल है, पर यहां के नजारे सारी थकान मिटा देते हैं। प्रकृति को करीब से देखना है तो बंगस आएं।”बंगस, गुगलडारा, दोबजन, तुलैल, गुरेज जैसे ऊंचाई वाले स्थलों को पर्यटन विभाग ने कुछ साल पहले ही मानचित्र पर लाया था। सड़क, होटल जैसी सुविधाएं अभी पूरी नहीं हैं, फिर भी ये जगहें तुरंत हिट हो गईं। गर्मी के बावजूद यहां चोटियों पर बर्फ जमी है और ठंडी हवाएं मौसम सुहावना बनाए हुए हैं। इससे 45°C की मार झेल रहे राज्यों के पर्यटक यहां लंबा प्रवास कर रहे हैं।

ठंडी जलवायु और शांति खींच रही पर्यटकों को

स्थानीय हितधारकों का मानना है कि सोशल मीडिया ने इन छिपे स्थलों को प्रमोट करने में बड़ी भूमिका निभाई है। गुरेज के टूर ऑपरेटर फारूक अहमद मीर ने कहा, “पर्यटक अब श्रीनगर, गुलमर्ग से आगे अनछुए स्थान चाहते हैं। गुरेज, तुलैल, बंगस अपने अनूठे आकर्षण के कारण पसंदीदा बन रहे हैं।”

ट्रैवल गाइड और होटल मालिकों के मुताबिक पिछले कुछ हफ्तों में पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ी है और कई लोग मौसम का आनंद लेने के लिए अपना प्रवास बढ़ा रहे हैं। पर्यटन अधिकारियों का कहना है कि देशभर में बढ़ती गर्मी के साथ आने वाले हफ्तों में इन अनूठे स्थलों पर पर्यटकों की संख्या और बढ़ेगी। कश्मीर तेजी से भारत के सबसे अधिक मांग वाले ग्रीष्मकालीन अवकाश स्थलों में शुमार हो रहा है।

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