मिडिल ईस्ट युद्ध के 40वें दिन आखिरकार अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर को लेकर सहमती बन गई। ईरान के 10 सूत्रीय प्लान के बाद अमेरिका ने दो हफ्तों के लिए हमला रोक दिया। अब इस समझौते से सबसे बड़ा फायदा ओमान को होता दिख रहा है।
ईरान के 10 सूत्रीय प्लान में एक प्राविधान है जिसके तहत ईरान और ओमान दोनों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर ट्रांजिट फीस लगाने की अनुमति होगी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज युद्ध की शुरुआत से ही IRGC के कंट्रोल में रहा है।
क्या कहता है नियम?
ईरान और ओमान के बीच 34 किलोमीटर चौड़ी यह रास्ता एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है। युद्ध से पहले तक किसी भी देश ने इस पर कोई टोल नहीं लगाया था। फारसी की खाड़ी का यह संकरा मुहाना दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल व्यापार मार्ग है।
एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक ईरानी अधिकारियों ने बताया कि ईरान होर्मुज से जमा होने वाले पैसे का इस्तेमाल युद्ध के बाद हुई क्षतिपूर्ति करने में करेगा, क्योंकि इस संघर्ष ने देश के रक्षा, प्रशासनिक और नागरिक बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचाया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी कहा कि ईरान का प्रस्ताव व्यावहारिक है, क्योंकि तेहरान ने कुछ शर्तों के साथ इस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने पर सहमति जताई है। यह जलमार्ग 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से ही प्रभावी रूप से बंद था।
ट्रंप ने कहा कि ईरान ने एक 10-सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है, जो बातचीत के लिए एक व्यावहारिक आधार है, उन्हें उम्मीद है कि दो हफ्ते की इस समय-सीमा के भीतर एक समझौता अंतिम रूप ले लेगा और पूरा हो जाएगा।
ईरान की क्या योजना है?
ईरान चाहता है कि अमेरिका और इजराइल की सेनाओं के साथ चल रहे युद्ध में किसी भी स्थायी शांति समझौते में तेहरान को जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) से गुजरने वाले जहाजो से शुल्क मांगने की अनुमति मिले। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि यह शुल्क जहाज के प्रकार, उसके माल और कुछ अन्य मौजूदा स्थितियों के आधार पर अलग-अलग होगा।
ईरान के उप विदेश मंत्री, काजेम गरीबाबादी ने पिछले हफ्ते कहा था कि ईरान ओमान के साथ मिलकर एक प्रोटोकॉल तैयार कर रहा है, जिसके तहत जहाजों को होर्मुज से गुजरने के लिए परमिट और लाइसेंस लेना जरूरी होगा।
उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद आवाजाही को रोकना नहीं, बल्कि उसे आसान बनाना है। ओमान ने कहा कि उसने आवाजाही सुनिश्चित करने के विकल्पों पर ईरान के साथ बातचीत की है, लेकिन उसने यह नहीं बताया कि क्या कोई समझौता हुआ है।
होर्मुज पर ईरान का दबदबा
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने युद्ध की शुरुआत से ही जलडमरूमध्य पर दबदबा बना रखा था। जिससे होर्मुज से कम से कम संख्या में जहाज गुजरे। बीच में ऐसी खबरें आई हैं कि ईरान ने जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए कुछ जहाजों से 2 मिलियन डॉलर का भुगतान मांगा है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।
क्या ईरान शुल्क लगा सकता है?
अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून को कंट्रोल करने वाला UNCLOS समुद्री समझौता कहता है कि जलडमरूमध्य से सटे देश, केवल वहां से गुजरने की अनुमति देने के लिए शुल्क की मांग नहीं कर सकते हैं।
हालांकि, वे जहाजों पर कुछ खास सेवाओं, जैसे कि पायलट सेवा, टगिंग (जहाज खींचने की सेवा) या बंदरगाह सेवाओं के लिए सीमित शुल्क लगा सकते हैं; लेकिन ये शुल्क किसी खास देश के जहाजों पर दूसरों की तुलना में ज्यादा नहीं लगाए जा सकते।