इंदिरा शासनकाल में सोना रखने पर लगा था प्रतिबंध, भाजपा ने विपक्ष को दिलाई पुराने दौर की याद…

पश्चिम एशिया संकट ने वैश्विक व्यवस्था को झकझोर दिया है। चुनौतियों के साये में भारत भी है। खास तौर पर प्रभाव पेट्रो पदार्थ, ऊर्जा और खाद्य तेल जैसे उत्पादों पर है।

आयात की बाधा को देखते हुए इन परिस्थितियों से निकलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से सोने की खरीद कम करने, पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, खाद्य तेल के कम उपयोग जैसी अपील की है।

जिसे मोदी सरकार की आर्थिक विफलता और विदेशी मुद्रा भंडार का संकट बताते हुए विपक्ष ने मुद्दा बनाने का प्रयास किया है तो भाजपा की ओर से सांसद निशिकांत दुबे ने पलटवार कर पुराने घटनाक्रमों को याद दिलाया है।

कई प्रसंग सामने हैं कि कैसे वर्तमान बाहरी संकट हो या पूर्व में पंडित नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह सरकार तक के शासनकाल में सामने आया सरकार का आंतरिक संकट, देशवासी समझौता करते रहे हैं।

नेहरू ने सोना दान कराया तो इंदिरा गांधी ने लगाया प्रतिबंध

1962 में भारत-चीन युद्ध के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था दबाव में थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रव्यापी अभियान चलाकर भारतीयों से अपने सोने के आभूषण राष्ट्रीय युद्ध कोष में दान करने का आग्रह किया। पूरे देश की महिलाओं ने अपने आभूषण, मंगलसूत्र, चूड़ियां सरकार को दान कर दी थीं।

इतना ही नहीं, 1962 के स्वर्ण नियंत्रण अधिनियम ने सोने के स्वामित्व और व्यापार पर व्यापक प्रतिबंध लगा दिए। बैंकों को गोल्ड लोन वापस लेने का आदेश दिया गया और सोने के व्यापार पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया गया। निशिकांत ने कहा कि उस वक्त गोल्ड कंट्रोल एक्ट लागू करने के कारण एक लाख दस हजार लोग जेल गए थे।

इंदिरा ने सोने की खरीद को बताया था विदेशी मुद्रा की बर्बादी

सितंबर 1966 में उन्होंने सदन को सीधे तौर पर बताया कि भारत की सोने की लत को तोड़ने के लिए राजकोषीय नीति और जन शिक्षा, दोनों को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।

उन्होंने साफ-साफ शब्दों में कहा कि राष्ट्रीय विकास के लिए हर उपलब्ध संसाधन की जरूरत होने के बावजूद सोने की खरीद विदेशी मुद्रा की बर्बादी है। कुछ दिनों बाद उन्होंने यही संदेश सीधे राष्ट्र को दिया और सोने को सामाजिक भ्रष्टाचार बढ़ाने वाला बताया।

निशिकांत ने कहा कि 1966 में गोल्ड कंट्रोल एक्ट लागू होने के कारण एक लाख दस हजार लोग जेल गए थे। बोले थे चिदंबरम, कम खरीदें सोना, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का है नुकसानसंप्रग सरकार में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने भारतीयों से सोना खरीदना बंद करने के लिए एक नहीं, बल्कि चार अलग-अलग अपीलें कीं।

पहली अपील मार्च 2013 में केंद्रीय बजट के एक दिन बाद आई। चिदंबरम ने आयात को नियंत्रित करने के लिए नागरिकों से सोने की खरीद कम करने की अपील की। दूसरी अपील मई, 2013 में आई। तब कहा कि सोने के प्रति भारत का जुनून चालू खाते में छेद कर रहा है। उन्होंने नागरिकों के इस व्यवहार को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान से जोड़ा।

वहीं, तीसरी अपील जून 2013 में आई। चिदंबरम ने बैंकों से आग्रह किया कि वे अपनी शाखाओं को सलाह दें कि ग्राहकों को सोने में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित न करें। सोना की खरीद में रुपया नहीं डॉलर खर्च होता है।

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