संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के लंबे और ऐतिहासिक संघर्ष के बाद 1 मई 1960 को महाराष्ट्र राज्य का गठन हुआ। इस आंदोलन ने मराठी भाषी लोगों को एक अलग पहचान दिलाई। इसके साथ ही मुंबई को राजधानी बनाकर, इस नए राज्य ने देश की आर्थिक और सांस्कृतिक दिशा को भी बदल दिया।
इसके लिखित इतिहास के अनुसार सबसे पहले इस राज्य में सातावाहन राजवंश और उसके बाद वाकाटक वंश का राज्य रहा है। फिर इस क्षेत्र पर कलचुरी, चालुक्य, यादव, दिल्ली के खिलजी और बहमिनी वंशों ने शासन किया। इसके बाद केंद्रीय सत्ता बिखरकर छोटी-छोटी सल्त्नतों में बदल गई।
17वीं शताब्दी में मराठा राज्य का उदय हुआ
वहीं, 17वीं शताब्दी में शिवा जी के प्रभावशाली बनने के बाद आधुनिक मराठा राज्य का उदय हुआ। शिवाजी ने बिखरी ताकतों को एकजुट कर शक्तिशाली सैन्य बल का संगठन बनाया। इस सेना की मदद से मुगलों को दक्षिण के पठार से आगे बढ़ने से रोका गया। फिर शिवाजी की मृत्यु के बाद मराठा शक्ति बिखरने लगी।
शिवाजी के उत्तराधिकारियों की विफलता के कारण पेशावओं ने सत्ता पर अधिकार कर लिया। सन 1761 में पानीपत की तीसरी लड़ाई के बाद मराठा शक्ति पूरी तरह से बिखर गई। अंतत 1818 तक अंग्रेजों ने पूरे मराठा क्षेत्र पर अपना अधिकार जमा लिया। इसके बाद, 1875 में नाना साहब के सैनिकों ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान गांधी और तिलक ने महाराष्ट्र के लोगों को एकजुट करने का काम किया।
आजादी के समय बॉम्बे स्टेट एक बड़ा प्रांत था
भारत की आजादी के समय बॉम्बे स्टेट एक बहुत बड़ा प्रांत था। इसमें मराठी और गुजराती बोलने वाले लोग एक साथ रहते थे। महाराष्ट्र के गठन के पीछे एक लंबा और ऐतिहासिक आंदोलन जुड़ा हुआ है। इसे संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के नाम से जाना जाता है। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य था कि मराठी भाषी क्षेत्रों को एक साथ लाकर एक अलग राज्य बनाया जाए, जिसकी राजधानी मुंबई हो।
इसके पीछे तर्क था कि, अगर मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी बने रहना है तो इसे केन्द्र शासित करना आवश्यक है। हालांकि, पंडित नेहरू की एक न चली। देश के पहले वित्त मंत्री और वित्त विशेषज्ञ चिंतामणि देशमुख ने इसका जमकर विरोध किया और इसी मुद्दे पर केन्द्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया।
1960 में भाषा के आधार पर बांट दिया गया
वहीं, बाद में बम्बई पुनर्गठन अधिनियम 1960 के अंतर्गत एक मई 1960 को इस सम्मलित प्रान्त को महाराष्ट्र और गुजरात नाम के दो अलग राज्यों में बांट दिया गया। पुराने बम्बई राज्य की राजधानी नए महाराष्ट्र राज्य की राजधानी बन गई। सन 1995 में बम्बई का नाम बदलकर मुंबई कर दिया गया।
महाराष्ट्र दिवस पर राज्य सरकार द्वारा शिवाजी पार्क में भव्य परेड आयोजित की जाती है। राज्य के राज्यपाल इस परेड की सलामी लेते हैं और ध्वजारोहण करते हैं। इस दिन महाराष्ट्र की समृद्ध संस्कृति और लोक कलाओं का प्रदर्शन किया जाता है।
लावणी, पोवाड़ा और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए राज्य की विरासत को याद किया जाता है। स्कूलों और सरकारी दफ्तरों में भी तिरंगा फहराया जाता है। यह दिन महाराष्ट्र के लोगों के लिए अपनी भाषा, मिट्टी और हक के प्रति एकजुटता दिखाने का बड़ा अवसर होता है।