Postgraduate Institute of Medical Education and Research की रिसर्च में खुलासा: गर्भपात के सटीक कारणों का पता, 91 जीन की पहचान; इनमें 10 सबसे ज्यादा जिम्मेदार…

बार-बार गर्भपात से जूझ रही महिलाओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। पीजीआई के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर की टीम ने गर्भपात के सटीक कारणों का पता लगा लिया है। अहम शोध में खुलासा हुआ है कि शरीर के कुछ खास हब जींस गर्भ ठहरने में बाधा बन रहे हैं।

अध्ययन में कुल 91 जींस की पहचान की गई है, जिनमें से 10 जीन सबसे ज्यादा असर डालने वाले पाए गए हैं। यह शोध आधुनिक ट्रांसक्रिप्टोम तकनीक के जरिए किया गया, जिसमें गर्भ से जुड़े टिश्यू के जीन का विस्तार से अध्ययन किया गया। यह शोध को चिता भारद्वाज और प्रियंका श्रीवास्तव की ओर से किया गया है।

डाॅक्टरों के मुताबिक, जब किसी महिला का दो या उससे अधिक बार गर्भपात हो जाता है तो उसे मेडिकल भाषा में रिकरेंट प्रेग्नेंसी लाॅस कहा जाता है। इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं, लेकिन कई मामलों में सटीक कारण सामने नहीं आ पाता। ऐसे में यह शोध नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

शोध के अनुसार, शरीर में मौजूद जीन ही यह तय करते हैं कि शरीर के अंदर प्रक्रियाएं कैसे काम करेंगी। यदि इन जींस में किसी तरह की गड़बड़ी हो जाती है, तो उसका सीधा असर गर्भधारण पर पड़ता है। अध्ययन में पाए गए 91 जीन में से 10 हब जींस ऐसे हैं, जो इस समस्या में सबसे ज्यादा भूमिका निभाते हैं।

यह जीन शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता, सूजन की प्रक्रिया और खून की नलियों के विकास को नियंत्रित करते हैं। इन प्रक्रियाओं में असंतुलन होने पर गर्भ ठहरने के बाद भी वह टिक नहीं पाता, जिससे गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है।

डॉक्टारों का कहना है कि इस शोध से भविष्य में इस समस्या की पहचान समय रहते करना आसान होगा। इसके साथ ही, इन जींस के आधार पर बेहतर और सटीक इलाज भी संभव हो सकेगा। आगे चलकर इन्हें जांच के लिए बायोमार्कर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *