21 साल बाद हत्याकांड का खुलासा, पत्नी से दुष्कर्म का बदला लेने के लिए दोस्त की कर दी थी हत्या…

महाराष्ट्र पुलिस ने 41 साल के एक ऐसे आरोपित को गिरफ्तार किया है, जो पालघर जिले में अपने दोस्त की हत्या के बाद फरार चल रहा था।

वह उत्तर प्रदेश में अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था। मीरा भायंदर-वसई विरार पुलिस ने गुरुवार को आरोपित राजेश सुरेश सोनकर को प्रयागराज जिले के एक गांव से गिरफ्तार किया।

शुक्रवार को एक प्रेस कान्फ्रेंस में एसीपी क्राइम मदन बल्लाल ने बताया कि आरोपित ने अपनी असली पहचान छिपाई हुई थी और उत्तर प्रदेश में ई-रिक्शा चला रहा था। यह मामला 27 दिसंबर, 2005 का है।

पालघर के भाटीबंदर गांव में 30 साल के दिलीप तुकाराम चव्हाण का शव मिला था। सिर पर गंभीर चोट लगने से चव्हाण की मौत हो गई थी। विरार पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। लेकिन कोई सुराग न मिलने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाया।

इस मामले में तब सफलता मिली जब मीरा भायंदर-वसई विरार पुलिस कमिश्नर ने कमिश्नरेट के अधिकार क्षेत्र में लंबे समय से अनसुलझे हत्या के मामलों की समानांतर जांच के आदेश दिए।

वसई में क्राइम ब्रांच यूनिट दो ने इस मामले की फाइलें खंगाली, अपराध स्थल के मूल डेटा की दोबारा जांच की और 2005 के गवाहों से फिर से पूछताछ की।

इस मामले में तब अहम मोड़ आया, जब जांचकर्ताओं को एक मुखबिर से जानकारी मिली कि आरोपित उत्तर प्रदेश में अपने पैतृक गांव में छिपा हुआ है।

फोरेंसिक और तकनीकी विश्लेषण का इस्तेमाल कर पुलिस की एक टीम ने उसकी सही लोकेशन का पता लगाया और उसे पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान सोनकर ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया। उसने पुलिस को बताया कि चव्हाण उसका दोस्त था। वे दोनों एक होटल में सफाई कर्मचारी के तौर पर साथ काम करते थे।

सोनकर ने पुलिस को बताया कि चव्हाण के एक परिचित ने उसकी पत्नी के साथ दुष्कर्म किया था। उसे शक था कि चव्हाण ने इस अपराध में आरोपित की मदद की थी। गुस्से में आकर सोनकर ने चव्हाण पर हमला कर उसकी हत्या कर दी और सुबूत मिटाने के लिए उसके शव को ठिकाने लगा दिया।

हत्या के बाद सोनकर तुरंत महाराष्ट्र से भाग गया। उसने शुरुआती छह साल लखनऊ में छिपकर बिताए और फिर प्रयागराज चला गया, जहां उसने अगले 15 सालों तक अपनी पहचान छिपाए रखी।

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