जिले में खरीफ सीजन की तैयारियों को देखते हुए किसानों को समय पर खाद एवं बीज उपलब्ध कराने के लिए आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्याद जगन्नाथपुर शाखा प्रतापपुर में पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों का भंडारण उपलब्ध है।
समिति के माध्यम से किसानों को सुगमता से खाद एवं बीज उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे क्षेत्र के किसानों में संतोष का माहौल है।
समिति से प्राप्त जानकारी के अनुसार अप्रैल माह से अब तक उर्वरकों के रूप में सुपर फास्फेट 119 क्विंटल, दानेदार सुपर फास्फेट 298 क्विंटल, एनपीके (12ः32ः16) 1341 क्विंटल, यूरिया 1352.70 क्विंटल तथा पोटाश 300 क्विंटल सहित कुल 3410.70 क्विंटल उर्वरक प्राप्त हुए हैं।
इसी अवधि में किसानों को सुपर फास्फेट 93.50 क्विंटल, दानेदार सुपर फास्फेट 39.50 क्विंटल, एनपीके (12ः32ः16) 572.50 क्विंटल, यूरिया 526.05 क्विंटल तथा पोटाश 104.50 क्विंटल सहित कुल 1336.05 क्विंटल उर्वरक का वितरण किया जा चुका है। शेष उर्वरक का पर्याप्त स्टॉक समिति में उपलब्ध है, जिससे आगामी दिनों में भी किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
ग्राम मानपुर केरता निवासी किसान शंखलाल पिता शिवचरण ने बताया कि उन्हें समिति से बिना किसी परेशानी के 12 बोरी डीएपी, 12 बोरी यूरिया, 02 बोरी राखड़, 02 बोरी धान बीज तथा 01 बोरी पोटाश प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि समय पर खाद एवं बीज मिलने से खेती की तैयारी आसान हो गई है और अच्छी फसल उत्पादन की उम्मीद बढ़ी है।
इसी प्रकार ग्राम केरता निवासी किसान समोली आयाम पिता महेश आयाम ने बताया कि वे जगन्नाथपुर समिति में खाद एवं बीज लेने पहुंचे थे, जहां उन्हें 04 बोरी यूरिया, 04 बोरी डीएपी, 02 बोरी राखड़, 01 बोरी पोटाश तथा 01 बोरी धान बीज आसानी से उपलब्ध हो गया। उन्होंने कहा कि समिति में सभी आवश्यक सामग्री उपलब्ध होने से किसानों को इधर-उधर भटकना नहीं पड़ रहा है।
दोनों किसानों ने शासन एवं समिति प्रबंधन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि खरीफ सीजन के दौरान खाद एवं बीज की पर्याप्त उपलब्धता किसानों के लिए राहत की बात है। समय पर उर्वरक एवं बीज मिलने से कृषि कार्यों में तेजी आएगी है तथा बेहतर उत्पादन की संभावनाएं बढ़ेंगी।
कलेक्टर श्रीमती रेना जमील के निर्देशन में किसानों की मांग के अनुरूप खाद एवं बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। पर्याप्त भंडारण एवं सुचारू वितरण व्यवस्था के माध्यम से किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि खरीफ सीजन में खेती प्रभावित न हो।