जातिगत जनगणना पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, याचिका पर विचार करने से किया इनकार…

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार के जाति आधारित जनगणना कराने के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी और कहा कि यह मुद्दा नीतिगत दायरे में आता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार को कल्याणकारी उपाय तैयार करने के लिए पिछड़ी जातियों से संबंधित व्यक्तियों की संख्या जानना आवश्यक है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जायमाल्य बागची और विपुल पंचोली की पीठ ने जनहित याचिकाकर्ता सुधाकर गुम्मुला की इस दलील से असहमति जताई कि सरकार के पास जातिगत विवरणों से संबंधित पर्याप्त जानकारी और आंकड़े उपलब्ध हैं। सुधाकर स्वयं अपनी दलीलें पेश करने के लिए उपस्थित हुए थे।

मुख्य न्यायाधीश ने जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा, “जनगणना जाति आधारित होनी चाहिए या नहीं, ये सभी नीतिगत मामले हैं। इसमें गलत क्या है। सरकार को यह जानना आवश्यक है कि पिछड़े वर्ग में कितने लोग हैं, उनके लिए किस प्रकार के कल्याणकारी उपाय किए जाने चाहिए। यह नीतिगत दायरे में आता है।”

2027 की जनगणना, जिसे आधिकारिक तौर पर 16वीं राष्ट्रीय जनगणना कहा जाएगा, 1931 के बाद पहली बार व्यापक जाति गणना को शामिल करने वाली जनगणना होगी और देश की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होगी।

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