मणिपुर के घाटी के पांच जिलों में दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन जनजीवन प्रभावित हुआ। बाजार और शिक्षण संस्थान बंद रहे।
सड़कें खाली नजर आईं। यह हड़ताल जनगणना से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू करने की मांग को लेकर बुलाई है।
सोमवार आधी रात से ‘कैंपेन फॉर जस्ट एंड फ्री डिलिमिटेशन’ (जेएफडी) द्वारा बुलाई गई हड़ताल के कारण इंफाल पूर्व, इंफाल पश्चिम, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर में सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रही। शिक्षण संस्थान बंद रहे। सार्वजनिक परिवहन सेवा भी प्रभावित हुई।
घाटी के विभिन्न जिलों में हड़ताल समर्थकों ने जगह-जगह बांस के खंभे और बड़े पत्थर रखकर सड़कें अवरुद्ध कर दीं। थौबल के अथोकपाम में प्रदर्शनकारियों ने सड़क के बीच टायर जलाए और एनआरसी नहीं, जनगणना नहीं जैसे नारे लगाए। हालांकि चूड़चंदपुर सहित पहाड़ी जिलों में हड़ताल का कोई असर नहीं पड़ा।
जनगणना 2027 के स्व-गणना चरण की शुरुआत 17 अगस्त से हुई। वहीं, मकान-सूचीकरण अभियान इस वर्ष एक सितंबर से 30 सितंबर तक चलाया जाना है।
जनगणना से पहले मणिपुर में एनआरसी लागू करने की मांग को लेकर छात्रों ने रविवार को इंफाल स्थित जनगणना संचालन निदेशालय के बाहर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े थे।
नगा ह्यूमैनिटेरियन एड कमेटी मणिपुर ने एनआरसी की मांग का समर्थन किया। इस बीच मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और उन्हें राज्य में एनआरसी लागू करने को लेकर की लोगों की मांग से अवगत कराया।
उन्होंने आर्थिक नाकेबंदी के मुद्दों को भी उठाया, जिसके कारण जरूरी चीजो की सप्लाई में रुकावट आई और महंगाई बढ़ गईं। शाह ने मुझे भरोसा दिलाया कि इन मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा।