पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव की जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (PMML) ने उनके जीवन और विरासत पर एक खास प्रदर्शनी आम लोगों के लिए खोली है। तीन मूर्ति भवन में स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय में यह प्रदर्शनी 30 जून तक चलेगी।
शनिवार को पीएमएमएल की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा ने “अ स्टेट्समैन्स जर्नी: पी वी नरसिम्हा राव” प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी में दुर्लभ तस्वीरों, सरकारी दस्तावेजों, भाषणों, पत्रों और आर्काइव से जुड़ी सामग्रियों का कलेक्शन दिखाया गया है।
पीवी नरसिम्हा राव की 105वीं जयंती
राव का जन्म 28 जून, 1921 को तत्कालीन हैदराबाद राज्य के करीमनगर जिले में हुआ था। उनका निधन 23 दिसंबर, 2004 को हुआ। रविवार को उनकी 105वीं जयंती थी। यह प्रदर्शनी दिखाती है कि कैसे राव ने निजाम-विरोधी ‘वंदे मातरम्’ आंदोलन के दौरान एक छात्र नेता के तौर पर अपना सार्वजनिक जीवन शुरू किया और भारत की आजादी की लड़ाई में एक अहम भागीदार के रूप में उभरे।
कई दशकों तक उन्होंने देश की कई अहम भूमिकाओं में सेवा की, जिनमें आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और विदेश, गृह और रक्षा मंत्री के पद शामिल हैं। उन्होंने 21 जून, 1991 से 16 मई, 1996 तक प्रधानमंत्री के तौर पर काम किया और देश के लिए उनकी असाधारण सेवाओं के सम्मान में उन्हें 2024 में मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।
प्रदर्शनी की खासियत
यह प्रदर्शनी भारत को गंभीर आर्थिक चुनौतियों के दौर से निकालने और उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण के लिए सुधार शुरू करने में राव की भूमिका को उजागर करती है, जिन्होंने देश के आर्थिक परिदृश्य को बदल दिया।
ये प्रदर्शनी राव के बहुआयामी व्यक्तित्व की झलक भी दिखाती है कि उन्होंने एक विद्वान, स्वतंत्रता सेनानी, सुधारक और दूरदर्शी नेता के तौर पर वैश्विक व्यवस्था में भारत की जगह को नए सिरे से तय करने में मदद की।
PMML ने एक बयान में कहा, “इस प्रदर्शनी के जरिए प्रधानमंत्री संग्रहालय का मकसद उस राजनेता की स्थायी विरासत का जश्न मनाना है, जिन्हें अक्सर आधुनिक और वैश्वीकृत भारत का निर्माता माना जाता है। साथ ही इसका मकसद छात्रों, शोधकर्ताओं और आम जनता के बीच उनके योगदान के बारे में जागरूकता बढ़ाना भी है।”