योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि देश में हिंदू, मुसलमान, क्षत्रिय, ब्राह्मण समेत अन्य कोई भी जाति खतरे में नहीं है।
भारतीय बचपन खतरे में है। देश की जवानी, देश का वर्तमान और भविष्य खतरे में है। कुछ लोग आंदोलन के लिए देश के बचपन का दुरुपयोग कर रहे हैं।
संविधान और लोकतंत्र की रक्षा, शिक्षा, चिकित्सा व्यवस्था आदि को लेकर आंदोलन होना चाहिए, व्यक्ति केंद्रित व्यवस्था नहीं होनी चाहिए।
सोमवार को राजधानी के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि मात्र एक पीएम देश को ठीक कर देंगे, यह अपेक्षा पूरी तरह उचित नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों से देश में बहुत कुछ अच्छा हुआ है। कुछ लोगों को यह अच्छा नहीं दिखता, यह गलत है। हमेशा न्यायपूर्ण दृष्टि से सोचना चाहिए।
उन्होंने छत्तीसगढ़ में मतांतरण रोधी कानून और धार्मिक उत्पीड़न के आरोपों पर कहा कि यह सब राजनीतिक टिप्पणी का हिस्सा है। देश में हिंदू, इस्लाम या ईसाई को कोई खतरा नहीं है।
असली खतरा भारत की प्रतिष्ठा, मान और मर्यादा को है। अतीत में जो भी मतांतरण हुए, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भविष्य में किसी का उत्पीड़न न हो।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान एक दिन फिर से भारत का हिस्सा बनेंगे। लोगों को इसके लिए थोड़ा धैर्य रखने की आवश्यकता है।
रामदेव ने पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में बौद्धिक अराजकता फैलाना पूरी तरह से गैर-लोकतांत्रिक है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को विरोध और अभिव्यक्ति की आजादी है, लेकिन यह स्वतंत्रता संवैधानिक, नैतिक और आध्यात्मिक सीमाओं के भीतर ही होनी चाहिए और इसका उपयोग देश के विनाश के लिए नहीं किया जाना चाहिए।