“…तो भाजपा विधायक बने रहने का कोई मतलब नहीं”; इस राज्य में नेताओं में क्यों बढ़ी नाराजगी…

मणिपुर के भाजपा विधायक टी. श्यामकुमार ने रविवार को कहा कि अगर पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व उन्हें मिलने का समय देने में “विफल” रहता है, तो वह विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बारे में सोचने पर मजबूर हो जाएंगे।

विधानसभा अध्यक्ष सत्यब्रत और विधायक के. जॉयकिशन, बसंत कुमार, करम श्याम, युमनाम खेमचंद, उशम देबेन, ख इबोम्चा और नूरुल हसन सहित मणिपुर के कम से कम नौ विधायक रविवार को अलग-अलग उड़ानों से दिल्ली के लिए रवाना हुए।

नई दिल्ली रवाना होने से पहले इंफाल हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए एंड्रो निर्वाचन क्षेत्र के विधायक ने कहा, ‘अगर पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व हमें मिलने का समय नहीं देता है, तो भाजपा विधायक बने रहने का कोई मतलब नहीं है और इस्तीफा देना होगा।’

श्यामकुमार ने कहा, ‘यदि केंद्रीय नेता मणिपुर में लोकप्रिय सरकार बनाने पर सहमत नहीं होते हैं, तो हमें अन्य विकल्पों पर विचार करना होगा।’

भाजपा विधायक ख इबोम्चा ने कहा, ‘सभी तीस भाजपा विधायक जा रहे हैं और हर बात पर चर्चा करेंगे।’

एनपीपी विधायक शेख नूरुल हसन ने कहा, ‘शांति बहाल हो गई है और लोगों की आकांक्षाएं सरकार के गठन की हैं। हमें उम्मीद है कि शीघ्र ही नए नेता के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हो जाएगा।’

पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व में भाजपा विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल पहले से ही राष्ट्रीय राजधानी में डेरा डाले हुए है। इस दल में एच डिंगो, टी रोबिन्द्रो, एस रंजन, गोविंददास कोंथौजम और पर्वतीय क्षेत्र समिति के अध्यक्ष डिंगांगलुंग गंगमेई शामिल थे।

सिंह ने शनिवार को संवाददाताओं से कहा था कि वह राज्य में एक लोकप्रिय सरकार के गठन के लिए केंद्रीय नेताओं पर दबाव डालेंगे और साथ ही आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (आईडीपी) और राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित मुद्दों को भी उठाएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *