भाजपा की गुटबाजी के चलते फाइनेंस कमेटी और सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर का चुनाव नहीं होने के कारण शहरी स्थानीय निकाय ने मेयर और 46 पार्षदों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है।
कारण बताओ नोटिस में कहा गया कि अभी तक फाइनेंस कमेटी का गठन किस वजह से नहीं हो पाया। इसके साथ ही सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चयन भी क्यों नहीं किया गया। इसकी वजह से नगर निगम को नुकसान उठाना पड़ रहा है। नोटिस का जवाब 7 दिन के भीतर देना होगा।
वहीं, नोटिस मिलने के बाद सभी पार्षदों में हलचल मच गई है। निगम सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही बैठक करके फाइनेंस कमेटी और दो अन्य पदों का चुनाव कर लिया जाएगा।
एक साल में दो बार फाइनेंस कमेटी का प्रयास
पिछले एक साल में दो बार फाइनेंस कमेटी और सीनियर और डिप्टी मेयर के चुनाव को लेकर प्रयास हो चुका है। पार्षद चुनाव के बाद ही चयन को लेकर बैठक आयोजित की गई थी। जिसमें कैबिनेट मंत्री कृष्णलाल पवार पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया था।
बैठक में केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर और सभी विधायक मौजूद थे। लेकिन मेयर प्रवीण बतरा जोशी और शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल बैठक में नहीं पहुंचे। जिसकी वजह से बैठक को स्थगित कर दिया गया।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष को खाली हाथ लौटना पड़ा
इसके बाद प्रदेश सरकार की ओर से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली को सभी पार्षदों को एकमत करने के लिए भेजा गया। लेकिन उस बैठक में केंद्रीय राज्यमंत्री के समर्थकों ने बायकाट कर दिया। जिससे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष को खाली हाथ लौटना पड़ा।
पूरे मामले को लेकर पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर मुकेश शर्मा का कहना है कि भाजपा गुटबाजी के कारण शहर को नुकसान उठाना पड़ रहा है। निगम के इतिहास में पहली बार मेयर और पार्षदों को नोटिस जारी किया गया है।