जन्मजात नागरिकता पर ट्रंप को झटका, जानिए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला भारतीयों के लिए क्यों वरदान…

अमेरिका में वीजा पर रह रहे और वर्षों से ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा कर रहे लाखों भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला एक वरदान के तौर पर है। शीर्ष अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस विवादास्पद कार्यकारी आदेश को 6-3 के बहुमत से खारिज कर दिया है, जो अमेरिकी धरती पर जन्म लेने वाले बच्चों के ‘जन्मजात नागरिकता’ के संवैधानिक अधिकार को समाप्त करना चाहता था।

ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही दिन इस नीति पर हस्ताक्षर कर अस्थाई प्रवासियों और पर्यटकों के बच्चों को इस अधिकार से वंचित करने का प्रयास किया था। अदालत के इस फैसले ने न सिर्फ ट्रंप की इस पाबंदी को नाकाम किया है, बल्कि प्रवासियों के बच्चों के संवैधानिक संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए प्रवासियों को बड़ी कानूनी राहत दी है।

आसान भाषा में समझे तो सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का मतलब यह है कि अब अमेरिका की धरती पर जन्म लेने वाले हर बच्चे को पहले की तरह ही अपने आप वहां की नागरिकता मिलती रहेगी। ऐसे में अब सवाल है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला अमेरिका में अपनी पढ़ाई पूरी करने वाले या ऐसा सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए बड़ी राहत की बात कैसे है? आइए जानते हैं।

पहले समझिए सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

जन्मजात नागरिकता कानून पर सुनवाई के दौरान अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के उस ‘कार्यकारी आदेश’ को खारिज कर दिया, जिसे उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही दिन लागू करने की कोशिश की थी।

ट्रंप चाहते थे कि जो लोग अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे हैं या जो पर्यटक के रूप में कुछ समय के लिए अमेरिका घूमने आए हैं, उनके बच्चों को अमेरिका में पैदा होने के बावजूद वहां की नागरिकता न मिले।

अदालत ने क्या कहा?

ऐसे में इस कानून को लेकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत का फैसला सुनाते हुए कहा कि अमेरिकी संविधान का ’14वां संशोधन’ बिल्कुल साफ है। इसके तहत अमेरिका में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति वहां का नागरिक है। इसे राष्ट्रपति के एक आदेश से बदला नहीं जा सकता।

अब समझिए भारतीय प्रवासियों के राहत कैसे?

चूंकि, जिस सवाल के साथ इस खबर की शुरुआत हुई थी। अब समय हो उसके बारे में समझन का कि आखिर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भारतीयों के लिए राहत कैसे है? इस बात को ऐसे समझिए कि इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय को मिलेगा, जो वहां सबसे तेजी से बढ़ने वाले प्रवासी समूहों में से एक हैं।

रिपोर्ट बताते हैं कि अमेरिका में करीब 12 लाख से ज्यादा भारतीय ऐसे हैं जो नौकरी के आधार पर मिलने वाले ‘ग्रीन कार्ड’ का इंतजार कर रहे हैं। इस कतार के कारण भारतीयों को ग्रीन कार्ड मिलने में दशकों का समय लग जाता है।

बच्चों का भविष्य सुरक्षित

इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि लाखों भारतीय प्रोफेशनल्स H-1B वीजा, L-1 वीजा या F-1 स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका में रहते हैं। उनके बच्चे माता-पिता को ग्रीन कार्ड मिलने से बहुत पहले ही अमेरिका में पैदा हो जाते हैं। इस फैसले के बाद, अब उन बच्चों को तुरंत अमेरिकी नागरिकता और वहां जिंदगी भर रहने का कानूनी अधिकार मिल गया है।

अवैध प्रवासियों के लिए भी सुरक्षा

इतना ही नहीं अमेरिकी कोर्ट के इस फैसले से वहां रह रहे अवैध प्रवासियों ने भी राहत की सांस ली है। ऐसे समझिए कि अमेरिका में वैध प्रवासियों के अलावा करीब 7.25 लाख ऐसे भारतीय भी हैं जिनके पास पूरे दस्तावेज नहीं हैं। इस फैसले से उनके बच्चों को भी जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिकता की गारंटी मिल गई है।

फैसले का अमेरिका में चौतरफा स्वागत

शीर्ष कोर्ट के इस फैसले का अमेरिका में चारों ओर स्वागत किया जा रहा है। भारतीय-अमेरिकी संगठन के कार्यकारी निदेशक चिंतन पटेल ने कहा कि यह फैसला भावुक करने वाला है। H-1B वीजा वाले भारतीयों के बच्चे माता-पिता के कानूनी रूप से स्थापित होने से बहुत पहले ही यहां पैदा हो जाते हैं। आज सुप्रीम कोर्ट ने उन परिवारों से कहा है कि आपके बच्चे अमेरिकी हैं और वे यहीं के हैं।

वहीं भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि यह फैसला संविधान के इस बुनियादी सिद्धांत को दोबारा स्थापित करता है कि अमेरिका में पैदा हुआ हर बच्चा यहां का नागरिक है। हमारे अधिकार राष्ट्रपति से नहीं, बल्कि संविधान से तय होते हैं।

नाखुश ट्रंप बोले- हमारे देश के लिए बहुत बुरा

अच्छा, गौर करने वाली बात यह है कि जहां एक ओर इस फैसले का खूब स्वागत किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप निराश हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला हमारे देश के लिए बहुत बुरा है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अमेरिकी संसद कानून बनाकर इसे आसानी से बदल सकती है।

हालांकि, जानकारों का कहना है कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला संविधान के आधार पर दिया है, इसलिए इसे बदलने के लिए अब अमेरिकी संसद में एक बड़ा ‘संवैधानिक संशोधन’ करना होगा, जो कि बेहद मुश्किल काम है।

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