सुप्रीम कोर्ट ने शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल की ओर से दाखिल की गई उस याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया, जिसमें उनके खिलाफ 2017 की आपराधिक मानहानि की शिकायत रद करने की मांग की गई थी।
बादल ने शीर्ष अदालत में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के अक्टूबर, 2025 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें शिकायत और मार्च, 2020 में एक न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन के आदेश को रद करने से इनकार कर दिया गया था।
क्या है मामला?
शिकायत के अनुसार, बादल ने जनवरी, 2017 में आरोप लगाया था कि धार्मिक संगठन ‘अखंड कीर्तनी जत्था’ (एकेजे) आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल का राजनीतिक मोर्चा है।
बादल उस समय पंजाब के उप मुख्यमंत्री रहे। यह शिकायत व्यक्तिगत रूप से दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि वह एकेजे का प्रवक्ता है। बादल की यह याचिका शुक्रवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई।
बादल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से पीठ ने कहा, ‘हमने इस आदेश को पढ़ा है। आप (बादल) पर क्या आरोप है। आप कहते हैं कि यह संगठन एक आतंकी संगठन है और यह शिकायतकर्ता दूसरे संगठन का प्रवक्ता है, जो राजनीतिक मोर्चा है।’
सिब्बल ने कहा कि बादल ने यह नहीं कहा था कि शिकायतकर्ता संगठन का प्रवक्ता है। उन्होंने कहा, ‘वह (शिकायतकर्ता) कहता है कि वह प्रवक्ता है। हम यह नहीं जानते हैं कि उसे किसने अधिकृत किया है।’ फिर पीठ ने याचिका खारिज कर दी।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि जनवरी, 2017 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल उसके घर आए थे और इस बारे में मीडिया में खबर छपी थी। उसने दावा किया कि बादल ने राजनीतिक रैलियों और मीडिया के सामने मानहानि करने वाला बयान दिया था और अखबारों में खबर भी छपी थी।