पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए सरकार ने मालवाहक जहाज के लिए कम दर पर इंश्योरेंस सेवा की शुरुआत की गई है।
मंगलवार को वित्तीय सेवाएं विभाग की तरफ से भारत मेरीटाइम इंश्योरेंस पुल (बीएमआईपी) की शुरुआत की गई।
वेदांता, बलरामपुर चीनी और होगर ऑफशोर जैसी कंपनियां इस पुल का सदस्य बन गई है।
इस पुल की मदद से 10 करोड़ डॉलर तक का जोखिम कवर किया जाएगा। इससे अधिक का नुकसान होने पर सोवरेन फंड से उसकी भरपाई होगी।
सभी प्रकार के युद्ध जोखिम को कवर करेगा पुल
12,980 करोड़ रुपए का सोवरेन फंड बनाया गया है। यह पुल सभी प्रकार के युद्ध जोखिम को कवर करेगा। पुल में शामिल इंश्योरेंस कंपनियां पालिसी जारी करेंगी। इस इंश्योरेंस सेवा से पश्चिम एशिया से माल लाना व ले जाना आसान व सस्ता होगा।
हालांकि इस स्कीम के तहत दुनिया के किसी भी कोने से भारत माल लाने वाले या भारत से माल ले जाने वाले जहाज को इंश्योरेंस सुविधा प्रदान की जाएगी।
अभी भारतीय जहाज सुरक्षा व खतरे से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समूह के क्लब पर निर्भर करते हैं जिससे उनकी लागत काफी अधिक आती है। इस खर्च को कम करने के लिए घरेलू स्तर पर इस प्रकार के क्लब की जरूरत थी। पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद इंश्योरेंस की लागत काफी बढ़ गई है।
पेट्रोलियम उत्पाद के लिए खाड़ी के देशों पर निर्भर है भारत
भारत पेट्रोलियम उत्पाद के लिए मुख्य रूप से खाड़ी के देशों पर निर्भर करता है। वहीं भारत का 20 प्रतिशत निर्यात भी खाड़ी के देशों में होता है। वित्तीय सेवाएं विभाग के सचिव एम.नागाराजु ने बताया कि इसका फायदा उपभोक्ताओं को भी होगा। जहाज की इंश्योरेंस लागत बढ़ने से उसकी वसूली भी उपभोक्ताओं से की जाती है। इंश्योरेंस सस्ता होने पर उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
इंश्योरेंस पुल की निगरानी के लिए एक प्रशासनिक समिति का गठन किया गया है। वित्तीय सेवाएं विभाग के सचिव इसके प्रमुख होंगे। इस समिति में शिपिंग विभाग व वाणिज्य विभाग के सचिव भी होंगे।