रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सैनिकों ने कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मन के नियंत्रण से हर चोटी, पहाड़ी और बंकर को पुनः प्राप्त किया। उनकी विजय देश की इस दृढ़ संकल्प का प्रतीक है कि वह अपनी भूमि, पहचान और सम्मान पर किसी भी शत्रुतापूर्ण दृष्टि का सामना पूरी ताकत से करेगा।
1999 में आपरेशन विजय की 27वीं वर्षगांठ पर आयोजित 13 दिवसीय स्मारक यात्रा ‘शौर्य विजय यात्रा’ 28 सवारों की भागीदारी देखेगी।
यह यात्रा 1,900 किमी की दूरी तय करेगी, जो उत्तरी हिमालय के कठिन भूभाग से होकर गुजरेगी, ताकि उन भारतीय वीरों के साहस, संकल्प और सर्वोच्च बलिदान को सम्मानित किया जा सके, जिन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में विजय सुनिश्चित की।
केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को यह बात दिल्ली के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से कारगिल युद्ध स्मारक, द्रास के लिए एक मोटरसाइकिल यात्रा का शुभारंभ करते हुए कही जिसमें सैनिक व पूर्व सैनिक और उनके स्वजन भाग लेंगे।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यात्रा के दौरान सवार “राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की पवित्र मिट्टी” का एक कलश ले जाएंगे, जिसे कारगिल में शहीदों की याद में अर्पित किया जाएगा।
सिंह ने कहा, “जब यहां (राष्ट्रीय युद्ध स्मारक) की मिट्टी कारगिल (द्रास स्मारक) की मिट्टी के साथ मिलती है, तो यह राष्ट्र की वर्तमान पीढ़ी की श्रद्धा और राष्ट्र के नायकों के साहस का संगम प्रतीक होगा।”
उन्होंने देश के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने “साहस, धैर्य, अनुशासन और अद्वितीय देशभक्ति का एक स्वर्णिम अध्याय लिखा, जिसे दुनिया भर की सेनाएं आज भी अध्ययन करती हैं और सम्मान के साथ देखती हैं।”
सिंह ने कहा, “लगभग 20,000 फीट की ऊंचाई पर और तापमान माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक गिरने पर हमारे सैनिकों ने साहस और दृढ़ता के साथ अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया। उन्होंने दुश्मन के नियंत्रण से हर चोटी, पहाड़ी और बंकर को पुनः प्राप्त किया और तिरंगे का सम्मान बनाए रखा।”
मंत्री ने सभी भारतीय वीरों, जिनमें परम वीर चक्र पुरस्कार प्राप्तकर्ता कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे, सूबेदार-मेजर (मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव (सेवानिवृत्त) और सूबेदार-मेजर (मानद कैप्टन) संजय कुमार (सेवानिवृत्त) के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की, जिन्होंने युद्ध में विजय सुनिश्चित करने में अमूल्य योगदान दिया।