गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्रीगोरखनाथ मंदिर में आयोजित साथ दिवसीय श्रीराम कथा के समापन अवसर पर बतौर गुरु अपने आशीर्वचन से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश को अस्थिर करने की साजिशों के प्रति लोगों को आगाह किया। कहा कि आज भी समाज में कालनेमि जैसे छद्म चेहरे सक्रिय हैं, जो अलग-अलग रूप धारण कर देश और सनातन संस्कृति को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है और इसी कारण भारत विरोधी ताकतें नई-नई साजिशें रच रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार रामायण में कालनेमि ने हनुमान जी को संजीवनी लाने से रोकने के लिए साधु का वेश धारण किया था, उसी तरह आज भी कुछ लोग अलग-अलग रूपों में समाज को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे लोगों को पहचानना और उनसे सावधान रहना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने कहा कि जो लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भारत विरोधी षड्यंत्रों में शामिल हैं, उन्हें समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा।
योगी ने कहा कि पहले नक्सलवाद के जरिए देश को अस्थिर करने की कोशिश होती थी, लेकिन आज उसके नए रूप सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि 12 वर्ष पहले देश के 120 जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे, जबकि आज एक भी जिला नक्सल प्रभावित नहीं बचा है। ऐसे में जो शक्तियां पहले नक्सलवाद को बढ़ावा देती थीं, वह अब दूसरे रूपों में समाज को बांटने और अशांति फैलाने का प्रयास कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने परिवार की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि माता-पिता, शिक्षक और बड़े भाई-बहन ही बच्चों के पहले गुरु होते हैं। छोटे बच्चों को कम उम्र में स्मार्टफोन की लत लगाने के बजाय परिवार में संवाद और संस्कार का वातावरण बनाया जाए। उन्होंने सप्ताह में एक दिन ‘स्मार्टफोन मुक्त’ रहने का भी आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भारत की वैदिक परंपरा और प्राचीन ज्ञान दुनिया की अमूल्य धरोहर है। पांडुलिपियों और ताम्रपत्रों के संरक्षण तथा डिजिटलीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। अंत में मुख्यमंत्री ने गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यदि समाज अपने कर्तव्यों, संस्कारों और राष्ट्रहित के प्रति सजग रहेगा तो भारत की प्रगति को कोई शक्ति रोक नहीं सकेगी।