$400 से बढ़कर $2500 हुआ समुद्री भाड़ा: मिडिल ईस्ट तनाव का असर, चावल की कीमतों पर पड़ने लगी मार…

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और तनावपूर्ण हालात के बीच भारत से चावल निर्यात एक बार फिर शुरू हो गया है, लेकिन इस बार बाजार की स्थिति बेहद अस्थिर बनी हुई है। समुद्री भाड़े में भारी बढ़ोतरी और वार रिस्क के चलते बीमा प्रीमियम शुल्क बढ़ने से निर्यात लागत में बड़ा उछाल आया है, जिसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर देखने को मिल रहा है।

जानकारी के अनुसार, जो समुद्री भाड़ा पहले 200-400 डालर प्रति कंटेनर था, वह अब बढ़कर 2300-2500 डालर तक पहुंच गया है। युद्ध के कारण समुद्री मार्गों पर बढ़े जोखिम के चलते शिपिंग कंपनियों ने अपने रेट कई गुना बढ़ा दिए हैं।

कई रुट्स को डायवर्ट किया जा रहा है, जिससे ट्रांजिट टाइम और लागत दोनों प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा, बीमा कंपनियां भी हाई-रिस्क जोन में भेजे जाने वाले कार्गो पर अतिरिक्त प्रीमियम वसूल रही हैं।

इन परिस्थितियों का असर चावल की कीमतों पर भी साफ दिखाई दे रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल की कीमतों में तेजी आई है और लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि इस तरह की अस्थिरता कई वर्षों में पहली बार देखने को मिल रही है, जहां कीमतें लगातार ऊपर-नीचे हो रही हैं।

मांग के लिहाज से मिडिल ईस्ट में भारतीय चावल, विशेषकर बासमती की डिमांड अभी भी मजबूत बनी हुई है। यही वजह है कि बढ़ी हुई लागत और जोखिम के बावजूद निर्यात गतिविधियां जारी हैं।

चावल उद्योग से जुड़े कारोबारी शिवम वार्ष्णेय (दौलत राइस एंड एग्रो प्रोडक्ट्स) ने बताया कि मौजूदा समय में बाजार पूरी तरह अनिश्चित है।

एक ओर लागत तेजी से बढ़ रही है, तो वहीं दूसरी ओर कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे हालात में व्यापार करना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन मांग बनी रहने से काम जारी है।

मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं होते हैं, तो आने वाले समय में चावल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।

फिलहाल बाजार हाई कास्ट और हाई वोलाटिलिटी के दौर से गुजर रहा है, जो व्यापारियों और खरीदारों दोनों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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