सनातन अनादि-अनंत है। यह बरगद के वृक्ष के समान है। द्रमुक नेता उदयनिधि स्टालिन के बोलने या कुछ करने से यह खत्म नहीं होगा।
यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सर संघ कार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि के बयान पर कही है।
उदयनिधि ने इस भाषण में सनातन धर्म को उखाड़ फेंकने की बात कही थी। इससे पहले भी उदयनिधि सनातन को लेकर नकारात्मक विचार रख चुके हैं।
होसबले ने कहा, सनातन इस देश की आत्मा है। यह कोई धार्मिक क्रिया नहीं है। यह एक मूल्य है जिसका नजरिया वैश्विक है और यह विश्व को एक परिवार मानता है। उदयनिधि की नकारात्मक सोच है जिसका जवाब लोगों ने चुनाव में दे दिया है।
इसलिए पेड़ हमेशा ताजगी लिए रहता है। इसी तरह से सनातन है। यह नित्य नूतन और चिर पुरातन है। यह अद्भुत मिश्रण है। यही हमारी हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति और सभ्यता है। हमने हमेशा बदलाव को स्वीकार किया है, उसी प्रकार से नई तकनीक और एआई का स्वागत कर रहे हैं।
पाकिस्तान से बातचीत के लिए खिड़की खोली जानी चाहिए- होसबले
एक प्रश्न के उत्तर में होसबले ने कहा, आमजनों के संपर्क और बातचीत से पाकिस्तान के साथ हमारे संबंधों में गतिरोध खत्म हो सकता है। साथ ही दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए खिड़की खोली जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व ने भारत का विश्वास खो दिया है। ऐसे में संबंधों को पटरी पर लाने की जिम्मेदारी पाकिस्तान की सिविल सोसायटी को संभालनी चाहिए। आरएसएस के उप प्रमुख ने कहा, ईरान युद्ध किसी सभ्यता को खत्म करने की लड़ाई नहीं है बल्कि यह तेल के लिए छेड़ा गया युद्ध है। इस स्थिति में भारत विभिन्न देशों और नेताओं के बीच सद्भाव पैदा करने वाली भूमिका निभा सकता है।
सनातन विरोधी टिप्पणी के लिए माफी मांगें उदयनिधि: विहिप
विश्व हिंदू परिषद ने मंगलवार को द्रमुक नेता उदयनिधि स्टालिन से सनातन धर्म पर उनकी टिप्पणी के लिए बिना शर्त माफी की मांग की और तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष से उन्हें सदन से निष्कासित करने का अनुरोध किया। विहिप ने उदयनिधि के बयान को सदन की कार्यवाही से हटाने का आग्रह भी किया।