केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में चीन की नई घुसपैठ के दावों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि पिछली सरकारों के दौरान सीमावर्ती इलाकों की लंबे समय तक अनदेखी की गई थी, लेकिन वर्तमान नरेन्द्र मोदी सरकार के लिए देश की सीमाएं सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।
चीनी घुसपैठ के दावों का खंडन
रिजीजू ने पूर्व रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी द्वारा वर्ष 2013 में संसद में दिए गए एक पुराने भाषण का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस नेता ने खुद स्वीकार किया था कि भारत की ऐतिहासिक नीति सीमावर्ती क्षेत्रों को अविकसित रखने की रही है।
इस नीति के कारण चीन को सीमा पर बुनियादी ढांचे और क्षमताओं के विकास में बढ़त हासिल करने का मौका मिल गया।
हालांकि, एंटनी ने अपने उसी संबोधन में यह भी कहा था कि यह नीति 20 से 25 साल पहले ही छोड़ दी गई थी और तब से अलग-अलग सरकारों ने इस नीति में बदलाव किया और सीमाओं पर सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना शुरू किया।
पहले हुई सीमाओं की अनदेखी
किरेन रिजीजू ने हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के सुदूर इलाकों जैसे माजा, गालेमो और ताक्सिंग क्षेत्रों का दौरा किया ताकि वहां चल रहे विकास परियोजनाओं में तेजी लाई जा सके।
उन्होंने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर स्पष्ट किया कि सीमावर्ती इलाकों में काम करना बेहद कठिन है, फिर भी सरकार देश की सुरक्षा और विकास के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार पिछली गलतियों को दोहराना नहीं चाहती है और स्थानीय लोगों की चिंताओं का पूरी तरह समाधान किया जाएगा।