रायपुर : कोण्डागांव जिले की शिल्पकला की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच रही है…

रॉट आयरन निर्माण प्रक्रिया से रूबरू हुई जयपुर की टीम

आदिवासी बहुल कोण्डागांव जिले की पारंपरिक शिल्पकला अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

ywAAAAAAQABAAACAUwAOw==

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत राजस्थान की प्रतिष्ठित संस्था इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्राफ्ट्स एंड डिजाइन (आईआईसीडी), जयपुर के विशेषज्ञों ने कोण्डागांव के ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर यहां के शिल्पकारों के कौशल को नजदीक से समझा।

ywAAAAAAQABAAACAUwAOw==

इस पहल का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप ढालना तथा शिल्पकारों को बेहतर विपणन अवसर उपलब्ध कराना है। विशेषज्ञ गांव-गांव पहुंचकर शिल्पकारों से सीधे संवाद करते हुए उनके कार्यों का अवलोकन कर सराहना की।

ग्राम करनपुर में ढोकरा शिल्प की जटिल निर्माण प्रक्रिया ने विशेषज्ञों को विशेष रूप से प्रभावित किया। वहीं ग्राम छोटेराजपुर एवं कुसमा में रॉट आयरन शिल्पकला को बारीकी से समझते हुए संबंधित समूहों से चर्चा की गई और बाजार से जुड़ी चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया।

इस दौरान राज्य कार्यालय से सहायक राज्य कार्यक्रम प्रबंधक श्री मनोज मिश्रा के नेतृत्व में जिला एवं विकासखंड स्तर के अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कोण्डागांव श्री अविनाश भोई के मार्गदर्शन में जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री कुंजलाल सिन्हा ने शिल्पकारों और विशेषज्ञों के बीच समन्वय स्थापित किया।

विशेषज्ञों ने माना कि कोण्डागांव के शिल्पकारों में अद्भुत कौशल और सृजनात्मकता है। उन्होंने कहा कि यदि इन उत्पादों को आधुनिक डिजाइन, बेहतर फिनिशिंग और प्रभावी ब्रांडिंग का सहयोग मिले, तो इनके मूल्य में कई गुना वृद्धि संभव है। साथ ही उन्होंने बाजार के नए रुझान, ग्राहकों की पसंद और आकर्षक पैकेजिंग के महत्व के प्रति शिल्पकारों को जागरूक किया।

इस पहल को आगे बढ़ाते हुए आईआईसीडी जयपुर ने बस्तर के शिल्पकारों को जयपुर आमंत्रित किया है, जहां उन्हें विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से ई-कॉमर्स, डिजाइन नवाचार और आधुनिक विपणन तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। संस्था का उद्देश्य शिल्पकारों को आधुनिक डिजाइन मानकों में दक्ष बनाकर उनके उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाना है।

ऐसे बदलेगी शिल्पकारों की तकदीर

इस पहल के अंतर्गत शिल्पकारों को आधुनिक डिजाइन, पैकेजिंग और ब्रांडिंग का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। साथ ही उन्हें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने के तरीकों से अवगत कराया जाएगा। जयपुर में प्रशिक्षण एवं एक्सपोजर से शिल्पकारों को नए अवसर मिलेंगे, जिससे उनके उत्पादों की मांग बढ़ेगी और आय में वृद्धि होगी।

मोर सुआद के व्यंजनों का लिया स्वाद

जयपुर से आए आईआईसीडी के प्रतिनिधियों ने ‘मोर सुआद’ के तहत छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया और उनकी सराहना की। ‘मोर सुआद’ का संचालन कर रही लक्ष्मी स्व-सहायता समूह की महिलाओं से संवाद करते हुए उनके नवाचार की प्रशंसा की और उनका उत्साहवर्धन किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *