रायगढ़ : बिहान से बदली तकदीर: रविता, अंजना और ललिता बनीं “लखपति दीदी”, अब गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा…

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन तिहार में साझा की सफलता की कहानी, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का दिया संदेश

घर की चौखट से निकलकर संभाला कारोबार, सिलाई से लेकर दोना-पत्तल और सेंटिंग प्लेट व्यवसाय तक बनाई पहचान

बिहान योजना से जुड़कर बढ़ी आय, अब अन्य समूहों को भी दिला रहीं रोजगार और आजीविका का रास्ता

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” से जुड़कर अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर आत्मनिर्भर बनी रायगढ़ जिले के पुसौर विकासखंड की रविता प्रधान, अंजना गुप्ता और ललिता शिकारी आज “लखपति दीदी” के रूप में नई पहचान बना चुकी हैं। कभी केवल घर-गृहस्थी तक सीमित रहने वाली ये महिलाएं आज सफल व्यवसाय संचालित कर आर्थिक रूप से सशक्त बन गई हैं और गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर प्रदेशभर में आयोजित सुशासन तिहार के तहत रायगढ़ जिले के पुसौर विकासखंड के ग्राम औरदा स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल परिसर में आयोजित समाधान शिविर में इन तीनों लखपति दीदियों ने अपनी सफलता की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान ने उनके जीवन को नई दिशा दी है। शिविर में मौजूद महिलाओं ने भी उनकी संघर्ष और सफलता की कहानी को उत्साह से सुना। इन महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए अन्य महिलाओं को भी स्व सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया।

बिहान योजना से जुड़ने से पहले इन महिलाओं के पास घरेलू कार्यों के अलावा कोई नियमित आय का साधन नहीं था। लेकिन समूहों से जुड़कर प्रशिक्षण, ऋण और रोजगार के अवसर मिलने से उन्होंने अपने जीवन को नई दिशा दी। आज वे न केवल अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही हैं, बल्कि लाखों रुपए की आय अर्जित कर आर्थिक रूप से मजबूत बन चुकी हैं।
 पंचायत सुकुलभठली के आश्रित गांव दाऊभठली की रहने वाली श्रीमती ललिता शिकारी ने बिहान से जुड़कर पूजा महिला स्व सहायता समूह का गठन किया। उन्हें सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण मिला, जिसके बाद उन्होंने घर से सिलाई कार्य शुरू किया। धीरे-धीरे वे अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देने लगीं। सिलाई कार्य के साथ उन्होंने गांव में किराना दुकान शुरू की और बाद में पक्का मकानों की ढलाई में उपयोग होने वाली सेंटिंग प्लेट का व्यवसाय भी प्रारंभ किया। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले घरों के लिए वे किराये पर सेंटिंग प्लेट उपलब्ध कराती हैं, जिससे उन्हें अच्छी आय हो रही है।

ललिता ने बताया कि व्यवसाय शुरू करने के लिए उन्हें बैंक से 50 हजार रुपए का मुद्रा लोन मिला। वन स्टॉप फैसिलिटी सेंटर से एक लाख रुपए तथा समूह को 6 लाख रुपए का ऋण मिला, जिसमें उन्हें व्यक्तिगत रूप से 60 हजार रुपए प्राप्त हुए। आज वे सालाना लगभग दो लाख रुपए की आय अर्जित कर रही हैं। उनका कहना है कि बिहान योजना ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी है।

इसी तरह रविता प्रधान ने भी बिहान योजना के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई है। मूलतः सुकुलभठली की रहने वाली रविता पहले केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, लेकिन सम्मानजनक रोजगार की तलाश ने उन्हें बिहान से जोड़ दिया। आज वे एफएलसीआरपी के रूप में कार्य कर रही हैं और महिला स्व-सहायता समूहों को शासन की योजनाओं से जोड़ने का कार्य संभाल रही हैं। उन्हें पुसौर विकासखंड के 6 ग्राम पंचायतों और 14 गांवों की जिम्मेदारी मिली है। वे महिलाओं को उनकी रुचि और जरूरत के अनुसार आजीविका के लिए ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में सहयोग करती हैं।

रविता को इस कार्य के लिए प्रतिमाह 7 हजार रुपए का मानदेय मिलता है। उन्होंने स्वयं सरस्वती महिला स्व सहायता समूह का गठन किया और खेती-किसानी के लिए समूह के माध्यम से 5 लाख रुपए का ऋण लिया, जिसमें उन्हें व्यक्तिगत रूप से 50 हजार रुपए मिले। तीन एकड़ सिंचित भूमि पर खेती कर रही रविता आज सालाना दो लाख रुपए से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं और “लखपति दीदी” की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं।
वहीं पुसौर विकासखंड के ग्राम कोसमंदा की रहने वाली श्रीमती अंजना गुप्ता ने बिहान योजना से जुड़कर दोना-पत्तल निर्माण का कार्य शुरू किया। मेहनत और लगन से उन्होंने धीरे-धीरे अपना व्यवसाय बढ़ाया और बाद में चप्पल निर्माण मशीन भी खरीदी। उन्होंने दुर्गा महिला स्व सहायता समूह बनाकर अन्य महिलाओं को भी जोड़ना शुरू किया। वर्ष 2020 में शुरू हुए इस व्यवसाय के लिए उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से एक लाख रुपए का ऋण मिला। इसके बाद सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से 60 हजार रुपए का अतिरिक्त ऋण प्राप्त हुआ, जिससे उनका व्यवसाय और मजबूत हुआ। तीनों महिलाओं ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि गांव में रहकर उन्हें सम्मानजनक व्यवसाय करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा। लेकिन बिहान योजना ने उनके सपनों को नई उड़ान दी। आज वे परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ अच्छी आय अर्जित कर रही हैं और गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

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