रायपुर : प्रधानमंत्री आवास योजना से सच हो रहा पक्के आशियाने का सपना…

सुदूर वनांचल में जीवन केवल भौगोलिक कठिनाइयों तक सीमित नहीं है, बल्कि असुरक्षा, संसाधनों की कमी और भविष्य की अनिश्चितताओं से भी जूझना पड़ता है। ऐसे ही चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत बादा निवासी नक्सल पीड़ित धरमपाल ने लंबे समय तक संघर्षपूर्ण जीवन व्यतीत किया। सीमित आय, जर्जर कच्चा मकान और परिवार की सुरक्षा की चिंता उनके जीवन का स्थायी हिस्सा बन चुकी थी।

धरमपाल ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय रामसाय गांव के पटेल थे और कृषि कार्य से परिवार का भरण-पोषण करते थे, किंतु माओवादी हिंसा की घटना में उनके पिता की हत्या हो जाने के बाद परिवार पर गहरा आर्थिक एवं मानसिक आघात पड़ा। परिवार में उनकी माता, दो पुत्र एवं पांच पुत्रियों के समक्ष आजीविका और सुरक्षा की गंभीर चुनौती उत्पन्न हो गई। पिता के असामयिक निधन के पश्चात धरमपाल ने मेहनत-मजदूरी कर किसी प्रकार परिवार का पालन-पोषण किया।

परिवार लंबे समय से मिट्टी एवं खपरैल से निर्मित जर्जर कच्चे मकान में निवास कर रहा था, जहां वर्षा और अन्य प्राकृतिक परिस्थितियों में असुविधा एवं असुरक्षा बनी रहती थी। ऐसे समय में शासन की पहल से वर्ष 2024-25 में नक्सल पीड़ित परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने तथा उन्हें स्थायी आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विशेष प्राथमिकता दी गई। इसी क्रम में धरमपाल का चयन प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत किया गया और उन्हें पक्का आवास स्वीकृत हुआ।

आवास निर्माण पूर्ण होने के उपरांत अब उनका परिवार सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण में जीवन यापन कर रहा है। धरमपाल का कहना है कि जहां पहले भविष्य को लेकर निरंतर चिंता बनी रहती थी, वहीं अब पक्का मकान मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के प्रति आशान्वित हैं।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आवास जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराकर शासन द्वारा सामाजिक सुरक्षा एवं स्थायित्व सुनिश्चित किया जा रहा है। धरमपाल ने इस जनकल्याणकारी योजना के लिए शासन के प्रति आभार व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण निश्चित ही जरूरतमंद परिवारों के जीवन में स्थायित्व, सुरक्षा और सम्मान का आधार बन रही है।

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