विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर रायगढ़ जिला इस वर्ष पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और सामुदायिक भागीदारी का बड़ा संदेश देने जा रहा है।
जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान और विभिन्न ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के तहत व्यापक जनजागरूकता एवं सहभागिता आधारित गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
इसका उद्देश्य केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि जल सुरक्षा, स्वच्छता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देना भी है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर जिले की सभी ग्राम पंचायतों, विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वच्छता अभियान, श्रमदान, वृक्षारोपण, जल संरक्षण शपथ तथा जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
स्कूली बच्चों के लिए चित्रकला, निबंध और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी, जबकि ‘एक बच्चा-एक पौधा’ अभियान विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
5 जून को आयोजित विशेष ग्राम सभाओं में पर्यावरण संरक्षण, जल प्रबंधन, पौधरोपण, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन तथा स्वच्छ ग्राम निर्माण पर चर्चा होगी। ग्राम पंचायतें कचरा पृथक्करण और स्वच्छता संबंधी संकल्प भी लेंगी।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से जल संरक्षण, पौधरोपण और स्वच्छता गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील करते हुए कहा है कि पर्यावरण संरक्षण तभी सफल होगा, जब यह शासन का कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज का सामूहिक संकल्प बने।
रायगढ़ में विश्व पर्यावरण दिवस का यह अभियान विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए जल और हरियाली की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आधार बनेगा।
जिला प्रशासन के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को मजबूत बनाने के लिए पिछले वर्षों में बड़े पैमाने पर कार्य किए गए हैं। वर्ष 2025-26 में जिले में जल संरक्षण और भूजल संवर्धन से जुड़े 791 कार्य स्वीकृत और क्रियान्वित किए गए, जबकि वर्ष 2026-27 के लिए 288 नए कार्यों को मंजूरी दी गई है।
अमृत सरोवर, तालाब, स्टॉप डैम, जलाशयों और अन्य जल संरचनाओं के निर्माण एवं विकास से वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण को नई मजबूती मिली है।
गौरतलब है कि रायगढ़ जिले में हरित आवरण बढ़ाने के लिए भी उल्लेखनीय प्रयास किए गए हैं।
मनरेगा के तहत व्यक्तिगत वृक्षारोपण, ब्लॉक प्लांटेशन और सड़क किनारे पौधरोपण जैसे 416 कार्यों में 68 हजार 247 पौधों की स्वीकृति दी गई, जिनमें से 46 हजार 23 पौधों का रोपण पूरा हो चुका है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने का भी माध्यम बन रही है।