रायपुर : सड़क से मुख्यधारा तक: छत्तीसगढ़ में संवर रहा बचपन, ‘बाल सक्षम नीति’ के तहत बेसहारा बच्चों के पुनर्वास के लिए महाअभियान जारी…

छत्तीसगढ़ में बच्चों के सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य को लेकर सरकार बेहद गंभीर है।

इसी कड़ी में प्रदेश के जिलों में ‘बाल सक्षम नीति’ के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक विशेष और सघन अभियान चलाया जा रहा है।

इस दो महीने लंबे अभियान 1 जून से 31 जुलाई तक का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर जीवनयापन करने वाले, भिक्षावृत्ति में लिप्त और बाल श्रम जैसी कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे बच्चों का स्थायी रेस्क्यू कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।

    ​कलेक्टर नारायणपुर  के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग और अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से बाल सक्षम नीति अभियान को युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है।

​हाट-बाजारों से लेकर गांवों तक ‘रेस्क्यू और पुनर्वास’ पर जोर

     ​अभियान के तहत ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नारायणपुर जिले के ग्राम गारपा, पांगुड, कोंगे, आकाबेडा और सोनपुर के साप्ताहिक बाजारों सहित विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सेक्टर स्तरीय बैठकें आयोजित की जा रही हैं।

      ​प्रशासनिक टीमें लगातार सार्वजनिक स्थलों, स्कूलों, सामाजिक बैठकों और स्थानीय हाट-बाजारों का दौरा कर रही हैं। यहाँ ऐसे बच्चों (CNCP – देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चे) की पहचान की जा रही है जो ​सड़क पर रहने या घूमने को मजबूर हैं। ​भिक्षावृत्ति या बाल श्रम में संलग्न तथा बुनियादी सुविधाओं और शिक्षा से वंचित हैं।

      ​चिन्हित किए गए इन बच्चों को तत्काल आवश्यक सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

​’मिशन वात्सल्य’ से मिल रहा संबल, समुदाय को किया जा रहा जागरूक

     ​इस अभियान का एक बड़ा हिस्सा जन-जागरूकता भी है। अधिकारियों के मुताबिक, सेक्टर बैठकों और जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से आम नागरिकों को ‘मिशन वात्सल्य योजना’ के अंतर्गत संचालित होने वाली गैर-संस्थागत सेवाओं और अन्य सरकारी कल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी दी जा रही है। ​ग्रामीणों और शहरी नागरिकों को समझाया जा रहा है कि यदि कोई भी बच्चा संकटग्रस्त, असुरक्षित या शोषण की स्थिति में दिखे, तो उसकी अनदेखी करने के बजाय तुरंत संबंधित विभाग को 1098 – चाइल्ड हेल्पलाइन (बच्चों की सुरक्षा और रेस्क्यू के लिए) तथा​112 – आपातकालीन सेवा में सूचित करें।

“बच्चों के अधिकारों की रक्षा में बनें सहभागी”

        ​मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए कलेक्टर  ने आम जनता से इस मुहिम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कोई भी बच्चा सड़क पर रहने या काम करने के लिए मजबूर न हो, यह हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। आम नागरिक अपने आसपास के जरूरतमंद बच्चों की पहचान कर प्रशासन को सूचित करें, ताकि उन्हें समय पर सहायता मिल सके और इस महाअभियान को पूरी तरह सफल बनाया जा सके।

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