प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नीदरलैंड्स के राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से रॉयल पैलेस में मुलाकात की और डिजिटल प्रौद्योगिकी, नवाचार, फिनटेक और ब्ल्यू इकोनमी में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
पीएम मोदी शुक्रवार को यूएई में एक संक्षिप्त ठहराव के बाद नीदरलैंड्स पहुंचे, यह उनकी पांच-देशों की यात्रा का दूसरा चरण है जिसमें स्वीडन, नार्वे और इटली भी शामिल हैं।
पीएम मोदी की नीदरलैंड्स के शाही परिवार से मुलाकात
पीएम मोदी ने बैठक के बाद एक्स पर पोस्ट किया- ‘रॉयल पैलेस में किंग विलेम-अलेक्जेंडर और उनकी महिमा रानी मैक्सिमा से मिले।
प्रौद्योगिकी, नवाचार, सतत विकास, वाणिज्य और जल संसाधनों जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारत-नीदरलैंड्स की मित्रता को बढ़ाने पर विचारों का आदान-प्रदान करना अद्भुत था।’
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर लिखा- ‘दोनों पक्षों ने भारत और नीदरलैंड्स के बीच बढ़ती साझेदारी पर चर्चा की।’
भारत और नीदरलैंड्स ने हाल के वर्षों में व्यापार, निवेश और जल, कृषि और स्वास्थ्य जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में सहयोग को काफी बढ़ाया है।
यह साझेदारी रणनीतिक क्षेत्रों में भी विकसित हुई है जिसमें प्रौद्योगिकी, नवाचार, रक्षा, सुरक्षा, सेमीकंडक्टर्स, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और समुद्री क्षेत्र शामिल हैं।
इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने हेग में आयोजित सीईओ गोलमेज सम्मेलन में डच कंपनियों को भारत में डिजाइन, नवाचार और निर्माण के लिए आमंत्रित किया और कहा कि देश में विशाल अवसर उपलब्ध हैं।
उन्होंने भारत के आर्थिक सुधारों और तीव्र बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर देते हुए कहा कि मैन्युफैक्चरिंग के लिए आज से बेहतर कोई समय नहीं हो सकता।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का भारत स्थिरता का प्रतीक है और दुनिया में कोई भी देश इसके बुनियादी ढांचे, स्वच्छ ऊर्जा और कनेक्टिविटी की स्पीड से मेल नहीं खा सकता।
इसी कारण भारत वैश्विक विकास में 17% का योगदान दे रहा है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि दोनों देश भारत-नीदरलैंड्स की विश्वसनीय साझेदारी को एक रणनीतिक साझेदारी में बदलने जा रहे हैं।
नीदरलैंड्स ने चोल वंश के 11वीं सदी के ताम्र पत्र भारत को लौटाए
पीएम मोदी के इस दौरे पर नीदरलैंड्स ने भारत को एक खास तोहफा दिया। वहां की सरकार ने चोल राजवंश के बहुत कीमती और ऐतिहासिक ताम्र पत्र (तांबे की प्लेट्स) मोदी की मौजूदगी में आयोजित समारोह में भारत को वापस सौंप दिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर को ‘हर भारतीय के लिए एक आनंदमय क्षण’ बताया। करीब 30 किलो वजनी ये ताम्र पत्र 21 बड़े और तीन छोटे प्लेटों का एक सेट है, जिनमें मुख्यतः संस्कृत और तमिल भाषाओं में शिलालेख अंकित हैं। यह 11वीं सदी में चोल राजाओं द्वारा जारी किए गए शाही चार्टर हैं। इन्हें ‘लीडेन प्लेट्स’ के नाम से भी जाना जाता है।
पीएम मोदी ने कहा- ‘ये चोलों की महानता को भी दर्शाते हैं। हम भारत में चोलों, उनकी संस्कृति और उनकी समुद्री शक्ति पर गर्व महसूस करते हैं।’
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया- ‘ये केवल अतीत की कलाकृतियां नहीं हैं, बल्कि भारत की विरासत और सभ्यता की अनमोल कहानी हैं। इन ताम्र पत्रों की घर वापसी भारतीय लोगों के लिए एक गहरा भावनात्मक आकर्षण रखती है।’