जापान के द्वीप पर जहरीले सांपों को खत्म करने की योजना पड़ी भारी, 30 नेवले बने दुर्लभ जीवों के लिए काल…

जापान के पर्यावरण मंत्रालय ने कागेशिमा प्रान्त में स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल अमामी ओशिमा द्वीप से छोटे भारतीय नेवलों के पूर्ण खात्मे की आधिकारिक घोषणा कर दी है।

दशकों तक चले ट्रैपिंग, ट्रैकिंग और व्यापक निगरानी अभियान के बाद विशेषज्ञ पैनलों ने पुष्टि की है कि 712 वर्ग किलोमीटर में फैले इस द्वीप से इस शिकारी जीव को पूरी तरह से हटा दिया गया है।

क्या है मामला?

इस संकट की शुरुआत साल 1979 में हुई थी, जब स्थानीय अधिकारियों और निवासियों ने जहरीले हाबू सांपों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए द्वीप पर लगभग 30 छोटे भारतीय नेवले छोड़े थे।

हाबू सांपों के काटने से स्थानीय निवासियों और किसानों को बड़ा खतरा रहता था। हालांकि, यह योजना पूरी तरह विफल रही क्योंकि दोनों जीवों की आदतें अलग थीं, हाबू सांप रात में सक्रिय होते हैं, जबकि नेवले दिन के समय शिकार करते हैं।

सांपों का शिकार करने के बजाय, नेवलों ने द्वीप के आसानी से मिलने वाले स्थानीय पक्षियों, छोटे स्तनधारियों, उभयचरों और सरीसृपों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।

पर्याप्त भोजन और किसी भी प्राकृतिक प्रतिद्वंद्वी के न होने से साल 2000 तक इनकी आबादी बढ़कर लगभग 10,000 हो गई, जिसने द्वीप के 80 प्रतिशत से अधिक भूभाग को प्रभावित कर दिया।

स्थानीय जीवों के अस्तित्व पर मंडराया संकट

नेवलों की तेजी से बढ़ती आबादी के कारण केवल रयूक्यू द्वीपसमूह में पाई जाने वाली कई दुर्लभ प्रजातियों का जीवन खतरे में पड़ गया। इनके मुख्य शिकार में संकटग्रस्त अमामी खरगोश, अमामी वुडकॉक, रयूक्यू लंबे बालों वाला चूहा और इशिकावा मेंढक शामिल थे।

1990 के दशक के अंत तक अमामी खरगोशों की संख्या में इतनी भारी गिरावट आई कि वे केवल दूरदराज के पहाड़ी जंगलों तक सीमित रह गए। इसके बाद जापान सरकार ने राष्ट्रीय संरक्षण कानूनों के तहत इस नेवले को विशिष्ट आक्रामक विदेशी प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया और इसे पूरी तरह हटाने का आदेश दिया।

दो दशकों का गहन अभियान

साल 2000 में पर्यावरण मंत्रालय के नेतृत्व में एक बड़ा उन्मूलन कार्यक्रम शुरू किया गया, जिसके तहत 2005 में अमामी मोंगूज बस्टर्स नाम की एक विशेष टीम का गठन हुआ। घने जंगलों में एक समय में 30,000 से अधिक पिंजरे और मोशन-सेंसर कैमरे लगाए गए। साथ ही, नेवलों को खोजने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित सूंघने वाले कुत्तों का इस्तेमाल किया गया।

अप्रैल 2018 में द्वीप पर अंतिम नेवला पकड़ा गया था। इसके बाद अगले छह वर्षों तक स्वचालित कैमरों, मिट्टी के पर्यावरणीय डीएनए परीक्षण और प्रशिक्षित कुत्तों की मदद से लगातार निगरानी रखी गई। कोई भी नेवला न मिलने पर आखिरकार इसे आधिकारिक तौर पर सफल घोषित किया गया।

प्राकृतिक विविधता की वापसी पर यूनेस्को की मान्यता

नेवलों के हटने से अमामी ओशिमा के स्थानीय वन्यजीवों में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिल रहा है। अमामी खरगोश, वुडकॉक और स्थानीय मेंढकों की आबादी फिर से बढ़ रही है और ये जीव उन तटीय निचले इलाकों में लौट आए हैं जहाँ से वे गायब हो चुके थे।

यह सफलता दुनिया के सबसे बड़े सफल द्वीप-आधारित उन्मूलन अभियानों में से एक है। इसी पारिस्थितिक बहाली ने साल 2021 में अमामी ओशिमा को यूनेस्को विश्व प्राकृतिक धरोहर स्थल का दर्जा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भविष्य में ऐसी प्रजातियों के दोबारा प्रवेश को रोकने के लिए बंदरगाहों पर सख्त बायो-सिक्योरिटी जांच जारी रखी जा रही है।

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