रायपुर : नरेगा से बदल रही गांवों की तस्वीर…

58 हजार से अधिक श्रमिकों को मिला रोजगार, 03 हजार 154 विकास कार्यों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई मजबूती

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) मुंगेली जिले में केवल रोजगार उपलब्ध कराने वाली योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन चुकी है। जिले में मनरेगा के तहत बड़े पैमाने पर विकास कार्य संचालित किए जा रहे हैं, जिनसे ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होने के साथ हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है। मनरेगा के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले में ग्रामीण विकास को नई दिशा मिली है और गांवों में आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव तैयार हो रही है।

जिले की 367 ग्राम पंचायतों में से 363 ग्राम पंचायतों में वर्तमान में 3,154 निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। इन कार्यों के माध्यम से 58 हजार 10 श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। गांवों में जल संरक्षण, आजीविका संवर्धन, अधोसंरचना निर्माण तथा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण से जुड़े कार्यों के चलते ग्रामीणों को अपने गांव में ही काम मिल रहा है, जिससे पलायन में उल्लेखनीय कमी आई है।

7 लाख मानव दिवस रोजगार, मजदूरों के खातों में पहुंचे 38 करोड़ रुपये

    महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत वर्ष 2026-27 में अब तक जिले में लगभग 07 लाख मानव दिवस रोजगार सृजित किया जा चुका है। योजना के तहत कार्यरत मजदूरों के खातों में लगभग 38 करोड़ रुपये की मजदूरी राशि का सीधे भुगतान किया गया है। मजदूरी का समय पर भुगतान होने से ग्रामीणों में योजना के प्रति भरोसा बढ़ा है।

जल संरक्षण कार्यों से गांव हो रहे आत्मनिर्भर

   मनरेगा के तहत जिले में जल संरक्षण एवं संवर्धन के अनेक कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। नवा तालाब निर्माण, खेत तालाब, डबरी निर्माण, मेड़बंदी, पौधरोपण और अन्य जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में भू-जल स्तर सुधारने में मदद मिल रही है। इन कार्यों का सकारात्मक प्रभाव खेती और ग्रामीण जीवन पर साफ दिखाई देने लगा है। गर्मी के मौसम में भी गांवों में रोजगार उपलब्ध होने से मजदूरों को शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ रहा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ गांवों में विकास की नई तस्वीर उभर रही है।

   कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार ने कहा कि मनरेगा अब केवल रोजगार उपलब्ध कराने वाली योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह ग्रामीण विकास का सशक्त माध्यम बन चुकी है। जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों में निरंतर कार्य संचालित किए जा रहे हैं। जल संरक्षण और अधोसंरचना निर्माण के कार्यों से गांव आत्मनिर्भर बन रहे हैं तथा लोगों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो रहा है।

    जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रभाकर पाण्डेय ने बताया कि मनरेगा के माध्यम से ग्रामीणों को सतत रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण भी किया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के कार्यों में भी बड़ी संख्या में श्रमिकों को रोजगार दिया जा रहा है। सभी जनपद पंचायतों को नियमित मॉनिटरिंग और गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं।

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