पाकिस्तान ने ईरान के लिए छह नए जमीनी व्यापार मार्ग खोल दिए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा हो गया है। इन रास्तों के जरिए ईरान अब रूस, चीन और अन्य देशों के साथ व्यापार कर सकेगा।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ईरान के खिलाफ समुद्री रास्तों पर सख्त रोक लगाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान ने इन मार्गों की आधिकारिक जानकारी इस हफ्ते दी है, ताकि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए होने वाले व्यापार पर निर्भर न रहे। अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि इससे ईरान को अमेरिकी दबाव से बचने में मदद मिल सकती है।
अमेरिका ने जताई चिंता
अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ डेरेक जे ग्रॉसमैन ने पाकिस्तान के इस कदम की आलोचना की है। उनका कहना है कि इससे अमेरिका की रणनीति कमजोर हो सकती है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का यह कदम ईरान को अमेरिकी नाकेबंदी से बचने में मदद देगा और वह अपना तेल व्यापार जारी रख सकेगा। उनके अनुसार, यह अमेरिका के साथ ‘डबल गेम’ जैसा है, जिससे दोनों देशों के रिश्तों पर असर पड़ सकता है।
इस फैसले के बाद पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगे हैं। इजराइल ने पहले ही पाकिस्तान को मध्यस्थ के रूप में भरोसेमंद नहीं माना था। ईरान की ओर से भी संकेत मिले हैं कि वह पाकिस्तान को पूरी तरह निष्पक्ष नहीं मानता। ईरान के नेता इब्राहिम रेजाई ने कहा कि पाकिस्तान दोस्त जरूर है, लेकिन मध्यस्थ के रूप में उपयुक्त नहीं है।
अमेरिका की रणनीति
अमेरिका डोनल्ड ट्रंप के नेतृत्व में ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति अपना रहा है। इसके तहत ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी की जा रही है। लेकिन पाकिस्तान द्वारा नए जमीनी रास्ते खोलने से इस रणनीति को झटका लग सकता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के बंदरगाहों पर ईरान जाने वाले हजारों कंटेनर पहले से रुके हुए हैं। अब इन कंटेनरों को जमीनी रास्तों से ईरान भेजा जा सकता है, जिससे अमेरिका की योजना पर असर पड़ने की आशंका है।