धुर्वा स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर के 300 साल के इतिहास में शुक्रवार की रात एक काला अध्याय जुड़ गया। लुटेरों ने मंदिर की सुरक्षा में तैनात 25 वर्षीय अनुभवी गार्ड बिरसा मुंडा की बेरहमी से हत्या कर दी और मंदिर की दो दान पेटियां तोड़कर लाखों के चढ़ावे पर हाथ साफ कर दिया।
हैरान करने वाली बात यह है कि अपराधियों ने दान पेटी से सिर्फ 500 के नोट और सोना-चांदी बटोरा, जबकि 100-50 व दस के नोट और सिक्के वहीं फर्श पर बिखेर दिए। बिरसा की हत्या पर आदिवासी समाज में आक्रोश बढ़ रहा है।
मरे हुए सिस्टम की बलि चढ़ा एक और हॉकी का खिलाड़ी। जिसने कभी तिरंगा थाम कर देश का बढ़ाया था मान। मंदिर की सुरक्षा में अंतिम सांस तक लड़ा, जबकि दो वर्ष से वेतन भी नहीं मिला था।
सुबह 5 बजे हुआ सनसनीखेज खुलासा
घटना की जानकारी शुक्रवार सुबह 5:00 बजे मिली, जब मंदिर के सेवक दिलीप और लालजी सफाई के लिए पहुंचे। उन्होंने देखा कि मुख्य गेट पर ताला लटका है। संदेह होने पर वे पीछे से सीढ़ी के सहारे अंदर घुसे, तो मंडप में सुरक्षा प्रहरी बिरसा मुंडा को लहुलुहान हालत में पाया।
बिरसा के सिर से भारी खून बह रहा था। मंदिर के पुजारी और प्रथम सेवक लाल सुधांशु नाथ शाहदेव को सूचना देने के बाद पुलिस को बुलाया गया। मौके पर एसएसपी राजीव रंजन, डीएसपी पारस राणा और हटिया डीएसपी प्रमोद मिश्रा सहित भारी संख्या में पुलिस बल पहुंचा।
एक हॉकी खिलाड़ी जिसने तिरंगे और हॉकी स्टिक का मान बढ़ाया
मृतक बिरसा मुंडा (60 वर्ष) बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वे हॉकी के बेहतरीन खिलाड़ी थे और उन्होंने बिहार व झारखंड का प्रतिनिधित्व किया था। 1986 में कन्याकुमारी में आयोजित नेहरू युवा केंद्र के राष्ट्रीय हॉकी शिविर में उन्होंने टीम का नेतृत्व किया था।
2006 में उन्हें मंदिर प्रबंधन द्वारा उत्कृष्ट सेवा के लिए ‘सर्वोत्तम उत्कृष्ट व्यक्ति’ के प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया था। वह पदक और प्रमाण पत्र आज भी उनके घर की दीवार पर उनकी ईमानदारी के गवाह बनकर टंगे हैं।
तीर-धनुष के भरोसे सुरक्षा, 2 साल से वेतन भी बकाया
परिजनों ने मंदिर कमेटी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बिरसा की पत्नी रूपम देवी ने रोते हुए बताया कि 25 सालों तक सेवा देने के बावजूद उन्हें सुरक्षा के लिए एक लाठी तक नहीं दी गई थी। बिरसा हर रात अपने घर से तीर-धनुष लेकर सुरक्षा के लिए मंदिर जाते थे।
विडंबना यह है कि मात्र 2000 रुपये महीने के वेतन पर काम करने वाले बिरसा को पिछले 2 साल से वह मानदेय भी नहीं मिला था। इसके बावजूद वे अपनी निष्ठा से पीछे नहीं हटे।
सीसीटीवी में कैद हुआ नकाबपोश लुटेरा
पुलिस ने जब सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो एक नकाबपोश युवक मंदिर के अंदर रॉड के सहारे दान पेटी तोड़ते हुए दिखाई दिया। पुजारी मदन पाढ़ी के अनुसार, सितंबर 2025 के बाद से दान पेटी नहीं खोली गई थी।
जिसमें 8 से 10 लाख रुपये नकद और सोने-चांदी के आभूषण होने का अनुमान है। अपराधी ने बड़ी चालाकी से केवल 500 के नोट और कीमती सामान ही उठाया।
तीन थानों के सेंटर पॉइंट पर सुरक्षा फेल
स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति भारी आक्रोश है। जगन्नाथपुर मंदिर का क्षेत्र जगन्नाथपुर थाना, धुर्वा थाना और विधानसभा थाना का केंद्र बिंदु है। इसके 200 मीटर की दूरी पर हाईकोर्ट और आधा किलोमीटर पर विधानसभा है।
लोगों का कहना है कि यह परिसर नशाखोरों और असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है। पुलिस की आपसी खींचतान और अनदेखी के कारण नशाखोरों का मनोबल इतना बढ़ गया है कि उन्होंने 300 साल में पहली बार मंदिर के अंदर हत्या और लूट जैसी वारदात को अंजाम दिया।
मुख्य आरोपी हिरासत में, जांच जारी
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मुख्य आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है। उसकी निशानदेही पर अन्य साथियों की तलाश में छापेमारी की जा रही है, हालांकि आधिकारिक तौर पर गिरफ्तारी की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पुलिस ने मौके से हत्या में प्रयुक्त लोहे की रॉड और बिरसा का वह तीर-धनुष भी जब्त कर लिया है जिससे वे मंदिर की रक्षा करते थे। शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया गया है।