यूपी पंचायत चुनाव में मिलेगा OBC आरक्षण, योगी सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग गठन को हरी झंडी दी…

प्रदेश सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण को लेकर ”उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग” के गठन काे स्वीकृति दे दी है।

यह आयोग पंचायतों में ओबीसी आरक्षण की प्रकृति, प्रभाव और वर्तमान सामाजिक स्थिति का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगा, जिसके आधार पर पंचायत स्तर पर आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा। पांच सदस्यीय आयोग में एक सदस्य उच्च न्यायालय के रिटायर न्यायाधीश होंगे। इन्हें ही आयोग का अध्यक्ष बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को उनके आवास पांच कालिदास मार्ग में कैबिनेट की बैठक हुई। इसमें कुल 12 प्रस्ताव स्वीकृत हुए हैं। सबसे अहम प्रस्ताव पंचायत चुनाव में ओबीसी का आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठित करने का है।

कैबिनेट में पास हुए प्रस्तावों की जानकारी देते हुए वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि इस आयोग का उद्देश्य ग्रामीण निकायों में पिछड़े वर्गों की वास्तविक स्थिति का समकालीन एवं अनुभवजन्य अध्ययन कर पंचायतवार आनुपातिक आरक्षण सुनिश्चित करना है।

आयोग पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था को संवैधानिक कसौटी पर परखते हुए वैज्ञानिक आधार उपलब्ध कराएगा। प्रदेश में वर्तमान में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर आरक्षण की व्यवस्था उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 तथा उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 के तहत लागू है।

इन अधिनियमों के अंतर्गत पंचायतों में अध्यक्ष एवं सदस्य पदों के आरक्षण और आवंटन के लिए अलग-अलग नियमावलियां भी प्रभावी हैं। इनमें “उत्तर प्रदेश पंचायत राज (स्थानों और पदों का आरक्षण एवं आवंटन) नियमावली, 1994” तथा “उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत (स्थानों और पदों का आरक्षण एवं आवंटन) नियमावली, 1994” हैं।

संविधान के अनुच्छेद 243-घ के तहत प्रदेश सरकार को पंचायतों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण निर्धारित करने का अधिकार प्राप्त है।

इसी क्रम में सरकार पंचायतों के स्थानों और पदों को आरक्षित करती है। नियमों के अनुसार आरक्षित सीटों की संख्या संबंधित वर्ग की जनसंख्या के अनुपात के आधार पर तय की जाती है।

प्रविधानों के अनुसार, पिछड़े वर्गों की सटीक जनसंख्या के आंकड़े उपलब्ध नहीं होने पर प्रदेश सरकार सर्वेक्षण के माध्यम से उनकी जनसंख्या निर्धारित करा सकती है।

सरकार यह पूरी प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित “ट्रिपल टेस्ट” के अनुरूप कराना चाहती है, ताकि भविष्य में आरक्षण व्यवस्था न्यायिक चुनौती में टिक सके।

इसी क्रम में अब समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठित किया गया है। आयोग के अन्य सदस्य ऐसे व्यक्तियों में से चुने जाएंगे जिन्हें पिछड़ा वर्ग संबंधी मामलों का अनुभव और ज्ञान हो। आयोग का कार्यकाल सामान्य रूप से नियुक्ति की तिथि से छह माह निर्धारित किया गया है।

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