केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा की है।
भारत जल्द ही व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन तकनीक को लागू करने जा रहा है, जो सड़क दुर्घटनाओं को काफी हद तक कम करने में मददगार साबित होगी।
इस तकनीक के माध्यम से वाहन एक-दूसरे से सीधे संवाद कर सकेंगे और ड्राईवर को ऑटोमैटिक चेतावनियां मिलेंगी, जिससे सुरक्षा स्तर में सुधार होगा।
क्या है V2V तकनीक?
गडकरी ने बताया कि यह प्रणाली कुछ चुनिंदा देशों में पहले से ही कम कर रही है। इसमें वाहनों को मोबाइल या इंटरनेट नेटवर्क की जरूरत नहीं पड़ती; वे सीधे सुरक्षा अलर्ट का आदान-प्रदान कर सकते हैं।
V2V सिस्टम वाहनों के आगे, पीछे और साइड में प्रभावी ढंग से काम करता है, साथ ही इलाके और सड़क के मोड़ों को ध्यान में रखते हुए छिपे खतरों के बारे में भी बताता है।
इसे एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) के साथ कंबाइन किया जाएगा, जिससे इसकी प्रभावशीलता कई गुना बढ़ जाएगी।
कितना आएगा खर्च?
गडकरी ने कहा कि प्रति वाहन इस सिस्टम की अनुमानित लागत 5,000 से 7,000 रुपये होगी। मंत्रालय वर्तमान में मानकों और नियमों को अंतिम रूप दे रहा है।
जल्द ही एक नोटिफिकेशन जारी की जाएगी, जिसके तहत नई गाड़ियों में इसे अनिवार्य रूप से लगाना होगा, जबकि पुरानी गाड़ियों में रेट्रोफिटिंग की व्यवस्था की जाएगी।
कार्यान्वयन को मजबूत बनाने के लिए दूरसंचार विभाग राष्ट्रीय फ्रीक्वेंसी आवंटन योजना के तहत मुफ्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराएगा, ताकि वाहन निर्माता और ऑन-बोर्ड यूनिट बनाने वाले बिना अतिरिक्त लागत के इसे तैनात कर सकें। सरकार का लक्ष्य इस साल के भीतर इस तकनीक को पूरी तरह से लागू करना है।