कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया ने साइबर हमलों और डिजिटल चोरी का एक ऐसा विशाल नेटवर्क खड़ा कर लिया है, जो दुनिया भर के वित्तीय संस्थानों और क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों को निशाना बनाकर मोटी कमाई कर रहा है।
हाल ही में दुनिया के प्रमुख क्रिप्टो एक्सचेंज बाइनेंस से 6.3 अरब डॉलर की चोरी में उत्तर कोरियाई सरकारी हैकरों का हाथ होने का गंभीर संदेह जताया गया है। ब्लॉकचेन इंटेलिजेंस फर्मों TRM लैब्स और चेनालिसिस के अनुसार, 29 अक्टूबर को हुए इस हमले के तार ट्रेडरट्रेटर नामक उत्तर कोरियाई हैकिंग समूह से जुड़े हैं।
ट्रेडरट्रेटर और लजारस ग्रुप की भूमिका
अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई पहले ही ट्रेडरट्रेटर को उत्तर कोरिया समर्थित एक बेहद खतरनाक साइबर समूह घोषित कर चुकी है। सुरक्षा शोधकर्ताओं के अनुसार, यह समूह लज़ारस ग्रुप, APT38, ब्लूनेरॉफ और स्टारडस्ट चोलिमा जैसे नामों से भी सक्रिय रहता है।
एफबीआई के अनुसार, यह समूह जून 2023 में एटॉमिक वॉलेट से 10 करोड़ डॉलर और उसके अगले महीने अल्फापो से 6 करोड़ डॉलर की चोरी जैसी कई बड़ी क्रिप्टो सेंधमारियों में शामिल रहा है।
कैसे काम करते हैं उत्तर कोरिया के हैकर?
उत्तर कोरियाई हैकर सीधे कंप्यूटर नेटवर्क तोड़ने के बजाय ‘सोशल इंजीनियरिंग’ और फर्जी पहचान का सहारा लेते हैं। उनका काम करने का तरीका इस प्रकार है।
- कर्मचारियों को फंसाना: वे लिंक्डइन या अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर नौकरी देने वाले रिक्रूटर बनकर क्रिप्टो कंपनियों के डेवलपर्स और आईटी इंजीनियरों से संपर्क करते हैं और भारी सैलरी वाले ऑफर्स का लालच देते हैं।
- फर्जी सॉफ्टवेयर डाउनलोड कराना: इसके बाद वे कर्मचारियों को ट्रेडिंग या प्राइस-प्रेडिक्शन टूल के नाम पर वायरस वाला मैलवेयर सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने के लिए मना लेते हैं।
- सिस्टम में घुसपैठ और फंड ट्रांसफर: एक बार कंपनी के कंप्यूटर में घुसने के बाद वे जरूरी पासवर्ड और डिजिटल एसेट तक पहुंच बना लेते हैं। इसके बाद वे गोपनीय प्रक्रिया को नियंत्रित कर फर्जी ट्रांजैक्शन के जरिए क्रिप्टो चोरी कर लेते हैं।
- पहचान छुपाना: चोरी की गई डिजिटल संपत्ति को पकड़ से बचाने के लिए हजारों अलग-अलग डिजिटल वॉलेट और विभिन्न ब्लॉकचेन में घुमाया जाता है, ताकि उसे ट्रेस करना लगभग नामुमकिन हो जाए।
फंडिंग के लिए हैकरों पर क्यों निर्भर है उत्तर कोरिया?
उत्तर कोरिया की साइबर अपराध पर बढ़ती निर्भरता के पीछे उसकी अंतरराष्ट्रीय अलग-थलग स्थिति और उस पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंध हैं।
परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों के कारण संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी देशों ने उस पर कई वित्तीय पाबंदियां लगाई हैं, जिससे पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली से विदेशी मुद्रा जुटाना उसके लिए असंभव हो गया है।
इसलिए प्योंगयांग ने इन पाबंदियों से बचने के लिए क्रिप्टो चोरी और डिजिटल मनी लॉन्ड्रिंग को अपनी कमाई का मुख्य जरिया बना लिया है।
हथियारों और मिसाइल कार्यक्रमों में इस्तेमाल
मल्टीलेटरल सैंक्शन्स मॉनिटरिंग टीम (MSMT) की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर कोरिया क्रिप्टो चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशों में छिपे अपने आईटी कर्मचारियों के जरिए कमाए गए धन का इस्तेमाल सामूहिक विनाश के हथियारों (WMD) और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों के लिए कर रहा है।
चोरी की गई इस रकम को चीन, रूस, वियतनाम, कंबोडिया, अर्जेंटीना और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में फैले बिचौलियों के नेटवर्क के जरिए पारंपरिक मुद्राओं में बदला जाता है।
आंकड़ों के अनुसार, उत्तर कोरिया 2025 तक 6.75 अरब डॉलर से अधिक की क्रिप्टोकरेंसी चुरा चुका था और हालिया हमलों ने इस आंकड़े को और भी अधिक बढ़ा दिया है।